गणोशोत्सव पर माटी से निर्मित प्रतिमाएं स्थापित करने संतों का आह्वान

8 वर्ष पहले
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जबलपुर। इसी के चलते जलीय जीव तथा मानव शरीर के साथ ही प्रकृति को भी हानि पहुंचने लगी और इसके दुष्परिणाम अनेक घातक बीमारियों के रूप में देखने को मिलने लगे। इसी से चिन्तित हमारे संतों ने जहां
केमिकल से निर्मित प्रतिमाओं की इस बार स्थापना नहीं करने का निर्णय लिया है, वहीं जनसामान्य से भी उन्होंने ऐसी मूर्तियां स्थापित नहीं करने का आग्रह किया है।

उल्लेखनीय है कि शहर में गणोशोत्सव एवं दुर्गोत्सव भी पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है और इसके लिए प्रतिमाओं का निर्माण काफी पहले से होने लगता है। देव प्रतिमाएं बनाने नगर में करीब आधा सैकड़ा कलाकार दिन-रात मेहनत करते हैं और इसके बाद प्रतिमाओं को स्थापित करने एवं पूजन-अर्चन के उपरांत विसर्जन का क्रम शुरू होता है।

कुछ समय पूर्व तक नदियों एवं जलाशयों में विसर्जित मूर्तियां पूरी तरह से पानी में घुल जाती थीं, लेकिन वर्तमान में ये धातुएं कई दिनों तक नहीं घुल पाती हैं, जिससे उनका अपमान होता है और इसीलिए अब संत समाज भी खासा चिन्तित हो उठा है।

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