जबलपुर. हाईकोर्ट ने माना है कि सड़क हादसों में सबसे ज्यादा मौतें उन युवाओं की होती हैं, जो बिना हैलमेट पहने दोपहिया वाहन चलाते हैं। जस्टिस अजित सिंह और जस्टिस आलोक वर्मा की युगलपीठ ने प्रदेश के गृह सचिव को कहा है कि हैलमेट को अनिवार्य करने के संबंध में उन्होंने क्या प्रभावी कदम उठाए हैं, इसका ब्यौरा हलफनामे पर दिया जाए। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।
युगलपीठ ने यह निर्देश साइंस कॉलेज जबलपुर के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. एके बाजपेयी द्वारा वर्ष 2006 में भेजे पत्र पर मंगलवार को सुनवाई के बाद दिए। आवेदक का कहना है कि वर्ष 2004 में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका के विचाराधीन रहने के दौरान सरकार ने वर्ष 2005 में संबंधित कानून में संशोधन भी किया था।
हाईकोर्ट ने 13 दिसम्बर 2005 को दोपहिया वाहन चालकों के लिए हैलमेट अनिवार्य करने के निर्देश भी दिए थे। साथ ही यह भी कहा गया था कि या तो दोपहिया वाहनों के साथ हैलमेट मुफ्त दिया जाए या फिर सब्सिडी रेट्स पर।
उसके बाद भी हाईकोर्ट के आदेश और सरकार द्वारा नियमों में किए गए संशोधन का पालन न होने पर यह पत्र भेजा गया था। पत्र में दोपहिया वाहन चालकों के लिए हैलमेट अनिवार्य किए जाने के संबंध में शासन और प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए जाने की राहत हाईकोर्ट से चाही गई है।