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हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को भेजा नोटिस मंत्री मलैया भी मुसीबत में

9 वर्ष पहले
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जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े एवं जस्टिस केके त्रिवेदी की युगलपीठ ने भोपाल निवासी पर्यावरणविद अजय दुबे की याचिका में केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय, मप्र आवास एवं पर्यावरण मंत्रालय एवं आवास पर्यावरण मंत्री जयंत मलैया को नोटिस जारी किए हैं। युगलपीठ ने नवबर 2012 में एनपी शुला को मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष पद पर नियुित में हुई अनियमितताओं के संबंध में दो सप्ताह में जवाब मांगा है।


भोपाल निवासी याचिकाकर्ता अजय दुबे की ओर से दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रदेश में जल एवं वायु संबंधी पर्यावरणीय स्वीकृति देने हेतु उच्चतम प्राधिकरण है, जिसकी स्वीकृति लिये बिना किसी भी तरह की बड़ी परियोजना जैसे खनन प्रक्रिया, पावर प्लांट, बांध आदि का निर्माण तक प्रारंभ नहीं हो सकता। बोर्ड में अध्यक्ष का पद सबसे महत्वपूर्ण है। जिसकी नियुित अर्हताएं नियम अनुसार काफी जटिल हैं। याचिका में नियुित प्रक्रिया को चुनौती देते हुए कहा गया कि नियुित के पूर्व, सार्वजनिक विज्ञापन जारी कर आवेदन बुलाये गये, उनका उच्च स्तरीय समिति द्वारा सूक्ष्म विश्लेषण भी किया गया, परंतु जब आवास एवं पर्यावरण मंत्री मलैया के समक्ष फाइल गई तो उन्होंने एनपी शुला की नियुित का आदेश पारित कर दिया।


याचिकाकर्ता की ओर से अधिवता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने तर्क दिया कि कार्यभार मंत्री द्वारा व्यितगत रुचि लेते हुए एनपी शुला को गुप्त तरीके से असंवैधानिक रूप से नियुत कर दिया गया, जो कि संविधान एवं अधिनियम के प्रावधानों के पूर्णत: विरुद्ध है। अन्य पात्र आवेदकों, जिनके नाम चयन समिति द्वारा अनुशंसित किये गये थे, उनको दरकिनार करते हुए किन आधारों पर श्री शुला की नियुित हुई, यह संदेहास्पद है और इस तरह से पिछले द्वार की गई नियुित के लिये स्वयं आवास मंत्री जिमेदार हैं। तर्कों को सुनने के बाद युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी करते हुए 2 सप्ताह में जवाब मांगा है।