जबलपुर. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि प्रदेश के पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा की व्यापमं घोटाले में क्या स्थिति है? इस मामले में शर्मा की ओर से दायर जमानत अर्जी पर राज्य सरकार की ओर से यह बताने समय लिया गया कि वे (लक्ष्मीकांत शर्मा) एक ही मामले में आरोपी हैं या उससे ज्यादा में। जमानत अर्जी पर अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी।
वर्ष 2012 में हुई आरक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर नितिन महेंद्रा और डॉ. पंकज त्रिवेदी के बयानों के आधार पर लक्ष्मीकांत शर्मा को आरोपी बनाकर एसटीएफ ने 23 जून 2014 को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि शर्मा ने अपने ओएसडी ओपी शुक्ला की मदद से 7 उम्मीदवारों को आरक्षक भर्ती परीक्षा में लाभान्वित किया था।
अर्जी में कहा गया है कि जिस आरोप में लक्ष्मीकांत शर्मा गिरफ्तार हैं, उन्हीं आरोपों में संजीव सक्सेना, डॉ. अजय शंकर मेहता और अखिलेश सिंह चतुर्वेदी को जमानत मिल चुकी है, लिहाजा उन्हें भी जमानत का लाभ प्रदान किया जाए। सुनवाई के दौरान सरकार ने यह बताने समय चाहा कि लक्ष्मीकांत शर्मा एक मामले में आरोपी है या उससे ज्यादा में।
जोशी दंपती के सहयोगी को मिली जमानत
जोशी दंपती की काली कमाई का निवेश अपनी कंपनी में कराने के आरोपी को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई है। जस्टिस जीएस सोलंकी की एकलपीठ ने शुक्रवार को सुनवाई के बाद आरोपी श्रीदेव शर्मा की अर्जी मंजूर करते हुए उसे जमानत का लाभ दिया। शर्मा पर आरोप है कि उसने पूर्व आईएएस अरविंद जोशी और उनकी पत्नी टीनू जोशी द्वारा अर्जित की गई काली कमाई अपनी कंस्ट्रक्शन कंपनी में लगाई, ताकि उस ब्लैकमनी को व्हाइट बनाया जा सके।
(पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा की फाइल फोटो)