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हाईकोर्ट ने सरकार से किया सवाल- जबलपुर में हो सकता है तो पूरे प्रदेश में क्यों नहीं?

7 वर्ष पहले
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जबलपुर. सीवर लाइन के लिए एक की बजाय विभिन्न स्थानों पर ट्रीटमेंट प्लान्ट लगाए जाने की जबलपुर नगर निगम की कार्ययोजना को हाईकोर्ट ने सराहा है। चीफ जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस केके त्रिवेदी की युगलपीठ ने सरकार से पूछा है कि क्या इस तरह के प्लान प्रदेश के सभी नगर निगमों में लागू हो सकते हैं? इस बारे में जवाब पेश करने युगलपीठ ने समय देकर अगली सुनवाई 17 अक्टूबर को निर्धारित की है।
गौरतलब है कि शहर में सीवर लाइन बिछाने की प्रक्रिया को चुनौती देकर कांग्रेस पार्षद मुकेश राठौर, तेजकुमार भगत, मदन लारिया व अन्य ने वर्ष 2005 में एक जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप था कि नगर निगम पहले सड़कें बना रहा है और फिर उन्हीं सड़कों को खोदकर सीवर लाइन बिछाएगा, जो जनता के पैसों की बर्बादी है।
इसी तरह वर्ष 2010 में नागरक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपाण्डे ने एक जनहित याचिका दायर करके सीवर लाइन बिछाने की प्रक्रिया और गति की वैधानिकता को चुनौती दी थी।
सीवर लाइन से संबंधित 6 मामलों पर हाईकोर्ट में एक साथ सुनवाई हो रही है। हाईकोर्ट ने 3 मार्च को हकीकत का पता लगाने वकीलों की एक कमेटी भी बनाई थी। मामले पर गत दिवस हुई सुनवाई के दौरान याचिकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी, राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता समदर्शी तिवारी और नगर निगम आयुक्त वेदप्रकाश के साथ अधिवक्ता अंशुमान सिंह हाजिर हुए। श्री सिंह ने युगलपीठ को बताया कि पिछली पेशी पर मुद्दा उठने के बाद ननि ने सेमीनार आयोजित किया था।