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सागर मेडिकल कॉलेज बचाने जबलपुर की बलि!

7 वर्ष पहले
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जबलपुर. तबादला किसी विभाग में एक निर्धारित प्रक्रिया है, लेकिन मेडिकल कॉलेजों के लिए यह परेशानी का सबब बनता है। यदि तबादला एक साथ हो गया तो जबलपुर मेडिकल कॉलेज की मान्यता खतरे में पडऩा निश्चित है, योंकि यहां एमसीआई का निरीक्षण होना है। जानकारी के अनुसार सर्जरी, मेडिसिन, ऑर्थोपेडिक, गायनी और इसके अलावा कुछ नॉन लीनिकल विभागों में तबादले किये जाने हैं।
जबलपुर मेडिकल कॉलेज से तबादलों से मुय तौर पर नुकसान यह होता है कि इंदौर, भोपाल के मेडिकल कॉलेज से ज्यादा स्थानांतरण किये नहीं जाते, इससे वहां समय पर एमसीआई का निरीक्षण हो जाता है। जबलपुर मेडिकल कालेज हमेशा पीछे रह जाता है और एमसीआई की गैर मान्यता वाली सूची में शामिल हो जाता है।
पिछली बारी यही हुआ, चिकित्सा शिक्षा मंत्री नरोाम मिश्रा ने ग्वालियर से स्थानांतरण कर किसी को नहीं भेजा और ग्वालियर मेडिकल कॉलेज को मान्यता मिल गई। इंदौर, भोपाल में भी किसी ने तबादले नहीं होने दिये और सिर्फ जबलपुर, रीवा ही ऐसे थे जो आखिर तक उलझे रहे।
ये शहर हमारी प्राथमिकता
जबलपुर हमारी हर तरह की प्राथमिकता में शामिल है। सागर मेडिकल कॉलेज को मान्यता मिले साी चाहते हैं, लेकिन जबलपुर मेडिकल कॉलेज का अहित होने नहीं देेंगे, हम किसी को यहां से जाने नहीं देंगे। इस बार एमबीबीएस डिग्री को समय पर मान्यता मिलेगी और कोई बाधा इसमें नहीं आएगी। -शरद जैन, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री
हमेशा दूसरों को महत्व
कई सालों से ऐसा हो रहा है कि किसी भी मेडिकल कॉलेज की फैकल्टी पूरी करने यहां से तबादले कर दिये जाते हैं। पहले भी ऐसा किया गया, जिससे मेडिकल कॉलेज बहुत सालों तक संघर्ष करता रहा, इस बार भी यदि ऐसा होने वाला है, जो बहुत ही दु:खदायी है। -डॉ. पीजी नाजपाण्डे, अध्यक्ष, नागरिक उपभोता मंच