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जापान भी हमारे मेंटेनेंस से हैरान, स्टेशन ने पूरे किए 50 साल, आज भी मील का पत्थर

6 वर्ष पहले
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जबलपुर। खुद जापानी वैज्ञानिकों को भी अहसास न रहा होगा कि जिस इलेक्ट्रिक उपकरण को भारत को सौंपा जा रहा है, उसकी उम्र इतनी लंबी भी हो सकती है? आधी सदी से भी ज्यादा का वक्त कम नहीं होता। एक जमाने में प्रदेश के बड़े हिस्से को पावर सप्लाई करने वाले नयागांव स्थित 220 केवीए सब स्टेशन के 50 साल पूरे हो गए हैं।
अच्छी खबर यह है कि मिस्तुबिशी का भारी-भरकम ट्रांसफार्मर आज भी पहले जैसी रफ्तार से करंट की सप्लाई दे रहा है। शहर की रगों में बिजली दौड़ाने के मामले में नयागांव सब स्टेशन की अहमियत शरीर में हृदय की तरह ही है। भले ही सब स्टेशन को बुजुर्गियत का दर्जा दिया जाने लगा हो, लेकिन पावर सप्लाई के मसले में इसकी महत्ता उम्मीद से भी कहीं ज्यादा है। जानकारों के अनुसार 8 फरवरी 1965 के दिन इसे 132 केवीए पर 20 एमव्हीएम क्षमता के साथ शुरू किया गया। वक्त के साथ अपग्रेडेशन भी जरूरी था, लिहाजा चंद वर्षों के बाद ही 1972 में इससे 220 केवीए की लाइनें जोड़ दी गईं। हाल फिलहाल सब स्टेशन 220 केवीए साइड 560 एमव्हीएम तथा 132 केवीए साइड पर 126 एमव्हीएम की पावर क्षमता के साथ पावर सप्लाई दे रहा है।
सिर्फ एक ही विदेशी मोर्चे पर
एक जमाने में देश में भारी क्षमता के ट्रांसफॉर्मर विदेशों से आयतित किए जाते रहे हैं। जानकारों का कहना है कि 8 जून 1969 को जापान से इटारसी, जबलपुर, भिलाई और बड़वाह के लिए 220 केवीए क्षमता के ट्रांसफार्मर मंगाए गए। वक्त के साथ उपकरणों ने साथ छोड़ दिया, लेकिन नयागांव में स्थापित किए गए ट्रांसफॉर्मर ने निर्माता कंपनी तक को हैरान कर दिया है। जानकारों का कहना है कि इसके पीछे की वजह लगातार मॉनीटरिंग और बेहतर मेंटेनेंस को माना जा रहा है।
सजावट कर खुशी मनाई
सब स्टेशन में ट्रांसमिशन कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों का उत्साह सोमवार को देखने ही बना। हालांकि एक दिन पहले ही सब स्टेशन की साजसज्जा की गई, जहां-तहां ध्वज, बैनर लगाए गए। स्टाफ ने मिठाइयां बांटीं और दिन भर इस बड़ी उपलब्धि का उत्सव मनाया।

बेहतर रखरखाव का नतीजा
बेहतर रखरखाव और सतत निगरानी की वजह से सब स्टेशन लंबी उम्र के बाद भी अच्छी परफॉर्मेंस दे रहा है। यह टीम वर्क के कारण ही संभव हो सका। बड़े ट्रांसफॉर्मर की क्षमता 30 से 35 साल ही होती है, लेकिन सही टाइमिंग पर होने वाले मेंटेनेंस की वजह से हम उपकरण का उम्मीद से ज्यादा उपयोग कर पा रहे हैं।
-डीसी जैन, चीफ इंजीनियर, मप्र पावर ट्रांसमिशन कंपनी