पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • वकील को थप्पड़ मारा, गवाह को कोर्ट उठने तक की सजा

वकील को थप्पड़ मारा, गवाह को कोर्ट उठने तक की सजा

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
जबलपुर। हाईकोर्ट ने उस गवाह को अदालत उठने तक की सजा सुनाई है, जिस पर सतना की जिला अदालत में गवाही कराने वाले वकील को थप्पड़ मारने का आरोप था। जस्टिस अजित सिंह और जस्टिस आलोक अराधे की युगलपीठ ने कहा है कि न्यायिक प्रक्रिया की अपनी पवित्रता होती है और उसको दूषित करने की इजाजत किसी को भी नहीं दी जा सकती।
आरोपी ने वकील को थप्पड़ मारकर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की है।
इस मत के साथ युगलपीठ ने आरोपी पर दो हजार रुपए का जुर्माना भी दायर किया है। प्रकरण के अनुसार 2 अप्रैल 2008 को सतना के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी की अदालत में एक मामले में गवाही चल रही थी। सतना की नागौद तहसील के ग्राम तौखड़ में रहने वाले बालकृष्ण शुक्ला की गवाही अधिवक्ता राजेश चतुर्वेदी करा रहे थे। प्रकरण में आरोप था कि प्रति परीक्षण के दौरान किसी बात पर बालकृष्ण बिगड़ गया और ताव में आकर उसने अधिवक्ता राजेश चतुर्वेदी को दो थप्पड़ मार दिए। कोर्ट में मौजूद स्टाफ ने जब उसे रोकने का प्रयास किया तो उसने जूता उतारकर वकील के सिर पर मार दिया। बालकृष्ण के इस रवैये को अदालत की अवमानना बताते हुए संबंधित जज ने उसे शोकॉज नोटिस जारी किया।

‘तो जाना होगा जेल’- अपने फैसले में युगलपीठ ने आरोपी पर दो हजार रुपए का जुर्माना भी दायर किया है। युगलपीठ ने कहा कि आरोपी एक माह में वहां के सीजेएम की अदालत में जुर्माने की रकम जमा करे। यदि वह जुर्माना जमा नहीं करता तो उसे एक माह की सजा काटने के लिए जेल जाना पड़ेगा। इस पर बालकृष्ण ने कहा कि वह जुर्माना भर देगा।
गवाह ने मारा यू टर्न
हाईकोर्ट द्वारा जारी नोटिस के जवाब में बालकृष्ण का कहना था कि चांटा उसने नहीं बल्कि संबंधित वकील ने अभद्र भाषा का प्रयोग करके उसे मारा था। उसने तो सिर्फ अपने आप को बचाने के लिए वकील राजेश चतुर्वेदी का हाथ पकड़ा था। उसका यह भी दावा था कि संबंधित वकील के दबाव में उस पर यह झूठा मामला थोपा गया है।
हरकत चौंकाने वाली’
अपने फैसले में युगलपीठ ने कहा-‘भरी अदालत में आरोपी द्वारा की गई हरकत चौंकाने वाली थी। न्यायिक प्रक्रिया काफी पवित्र होती है। अब चाहे वकील हो या पक्षकार, किसी को भी उसको दूषित करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। जो आरोपी बालकृष्ण ने किया, उससे अदालत की गरिमा को ठेस पहुंची है। उसे माफ नहीं किया जा सकता।’
बीबी-बच्ची का क्या होगा’
सोमवार को युगलपीठ के सामने हाजिर बालकृष्ण शुक्ला को सजा के प्रश्न पर सुना गया। उसका कहना है कि वह पेशे से ड्रायवर है और उसकी पत्नी अशिक्षित है। उसकी 5 साल की बेटी भी है। यदि उसे जेल भेजा गया तो उसकी बीबी और बच्ची का क्या होगा। इस पर युगलपीठ ने उसे सजा के रूप में दिन भर अदालत में खड़े रखा। पी-1