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मेरेगांव बना रेत की अवैध स्टाॅक की मंडी, शासन को करोड़ों के राजस्व की क्षति

7 वर्ष पहले
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जबलपुर. रेत के कारोबारियों को मानो इन दिनों घोषित तौर पर अवैध स्टाॅक करने की अनुमित मिली हुई है। कटंगी-पाटन मार्ग पर हुए अवैध स्टाॅक पर तो जिला माइिनंग विभाग द्वारा की
गई कार्रवाई से इस बात का खुलासा हाे चुका है की रेत का अवैध रूप से स्टाॅक किया जा रहा है।
मेरेगांव क्षेत्र में किया गया रेत का अवैध स्टाॅक देखकर तो ऐसा लगता है मानो यहां की नदियों में रेत बची ही नहीं होगी। कहने वाले तो यहां तक कह रहे हैं कि इस समय मेरेगांव रेत के अवैध स्टाॅक की मंडी बना हुआ है। रेत का अवैध स्टाॅक केवल मेरेगांव तक ही नहीं सीमित है, बल्कि पड़ोसी गांवकूड़ाकलां, पावला, बेलखेड़ी सहित आसपास तक फैला हुआ है।
अतिरिक्त राशि बचाकर शासन को पहुंचा रहे क्षति

रेत माफिया यह बात अच्छी तरह से जानता है कि बरसात के दिनों में रेत निकालना प्रतिबंधित है, हालांकि यह माफिया किसी प्रतिबंध को नहीं मानता, मगर नदियों में पानी भरा होेने और बहाव तेज होने के कारण भी रेत निकालना संभव नहीं होता, इसिलए बरसात से पूर्व दिन-रात मशीनें लगाकर रेत निकाली जाती है। शासन का यह भी नियम है कि अगर बारिश से पूर्व रेत निकालकर स्टाॅक की जाती है तो इस स्टाॅक की अतिरिक्त राॅयल्टी जमा करनी जरुरी है, इसके साथ ही रोजाना विक्रय की रसीद जमा कर स्टाॅक बिक्री के लिए कलर वाली पर्ची का अावंटन कराना भी जारी है, मगर रेत माफिया द्वारा स्टाॅक से रेत का विक्रय भी पुरानी रसीद से किया जा रहा है। जिससे शासन को अतिरिक्त रायल्टी न मिलने पर करोड़ों रूपए का नुकसान हो रहा है।