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नौबत ऐसी जच्चा के साथ बच्चा भी जमीन पर, 10 सालों से मांग रहा 300 बिस्तर

7 वर्ष पहले
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जबलपुर. लेडी एल्गिन हाॅस्पिटल को 112 बिस्तरों से बढ़ाकर 300 बेडेड करने का प्लान एक दशक बाद भी साकार नहीं हो सका है। संभाग के एक मात्र महिला हॉस्पिटल की दशा वर्तमान में ऐसी हो गई है कि कम से कम दो दर्जन के करीब महिलाएं किसी न किसी स्थिति में जमीन में ही पड़ी रहती हैं। ऐसी महिलाओं के लिए हर दिन फ्लोर बेड लगाना पड़ता है। कई बार तो हालात ऐसे तक बनते हैं कि जच्चा के साथ बच्चा को भी जमीन पर लेटने की नौबत आ जाती है, हालांकि बच्चे को किसी तरह एसएनसीयू में शिफ्ट कर दिया जाता है, लेकिन माता को यह कष्ट भोगना ही पड़ता है।

अस्पताल में महिला मरीजों की संख्या और उनको होने वाली परेशानी का अंदाजा इसी बात से लगाया जाता है कि शुक्रवार के दिन ही 112 बिस्तरों पर 172 महिलाएं भर्ती थीं। प्रबंधन ने हालांकि अतिरिक्त बिस्तरों का इंतजाम किया, लेकिन उसके बावजूद भी दो दर्जन के करीब महिलाओं को बिस्तर नहीं मिल सका। अस्पताल में ऐसे हालात के लिए प्रबंधन से जुड़े अधिकारी कहते हैं कि ज्यादा संख्या में महिला मरीजों के आने से ऐसे हालात बने हैं। यदि अस्पताल में बिस्तर बढ़ जाएं और उसी अनुपात में कुछ स्टाफ बढ़े तो फिर ऐसी समस्या का स्वत: ही समाधान हो सकता है।
प्रपोजल फाइलों में कैद

सरकार एक तरफ यह दावा करती है कि जच्चा और बच्चा के इलाज को लेकर फण्ड की कोई कमी नहीं हर तरफ इसके लिए इंतजाम किये जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एल्गिन जैसी उपयोगी महिला अस्पताल की सुविधाओं की ओर ध्यान ही नहीं दिया जाता है। जानकारी के अनुसार अस्पताल में बिस्तरों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव कई सालों से यहां से तैयार कर भोपाल भेजा जा रहा है, लेकिन वहां कोई इस पर ध्यान देने वाला नहीं है। जब कभी विभाग के अधिकारी दौरे पर आते हैं तो कुछ चर्चा होती है, लेकिन मामला फिर वही पुरानी स्थिति में पहुंच जाता है।
पूरा लोड मेडिकल- एल्गिन पर
लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग ने संस्थागत प्रसूति को बढ़ावा देने के लिए कई जगह प्रसूति केन्द्र को विकसित किये, लेकिन सच्चाई यही है कि आज भी प्रसूति संबंधी मामलों में सारा का सारा बोझ मेडिकल काॅलेज अस्पताल और एल्गिन के ऊपर निर्भर है। सिहोरा, पाटन, मझौली, पनागर, नटवारा जैसे केन्द्रों में अभी भी महिलाएं इलाज के लिए तरसती हैं। न चाहते हुये भी अव्यवस्थाओं के चलते महिला मरीजों को शहर तक इन केन्द्रों तक आना पड़ता है।

सरकार लगातार अस्पतालों में संसाधन बढ़ाने का प्रयास कर रही है, जहां भी कमी है वहां समाधान निकाला जाता है। एल्गिन की वर्षों पुरानी मांग को हम जल्द से जल्द पूरा करने की कोशिश करेंगे, ताकि महिला मरीजों को परेशानी न हो। शरद जैन, स्वास्थ्य राज्यमंत्री