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मुकेश अंबानी जबलपुर में करेंगे निवेश, आईटी हब भी बन सकता है शहर

7 वर्ष पहले
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जबलपुर. देश के पूर्व एडीशनल सॉलीसिटर जनरल विवेक कृष्ण तन्खा ने कहा कि जबलपुर का पिछड़ापन डुमना एयरपोर्ट देखकर ही पता चल जाता है। एक जमाना था जब यह शहर देश के उन चुने हुए स्थानों में शामिल हुआ करता था, जहां से उड़ानें हुआ करती थीं, लेकिन 90 का वह दशक भी आया, जिसमें यहां से उड़ानें बंद कर दी गईं, क्योंकि यहां के हवाई अड्डे का अपग्रेडेशन नहीं हुआ था। फिर इसके बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर यहां के हवाई अड्डे की एयरस्ट्रिप लंबी की गई और एक छोटा टर्मिनल भवन बनाया गया और फिर उड़ानें भी शुरू हुईं, लेकिन आज फिर इस हवाई अड्डे को विस्तार की जरूरत है, जिसके बिना इस आधुनिक जमाने में शहर के विकास की कल्पना संभव नहीं है।
रायपुर में देखें विकास
श्री तन्खा ने मध्यप्रदेश सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यदि विकास देखना है तो रायपुर का देखें। छत्तीसगढ़ की राजधानी ने भोपाल को भी पीछे छोड़ दिया है और इन्दौर से टकर ले रही है। रायपुर का हवाई अड्डा विकास पूरे क्षेत्र की विकास की कहानी स्वयं कहता है। यहां से 26 उड़ानें हैं, जो प्रगति की निशानी है। जबलपुर-कटनी 4 घंटे, अविश्वसनीय
प्रदेश की सड़कों की दुर्दशा पर चर्चा करते हुए श्री तन्खा ने कहा कि यह अविश्वसनीय है कि जबलपुर-कटनी के बीच की 100 किलोमीटर की दूरी तय करने में 4 घंटे लगते हैं। इसके पीछे
जिमेदारी चाहे राज्य सरकार की हो या फिर केन्द्र सरकार की, खामियाजा वह जनता भुगत रही है। नेताओं का दायित्व है जनता की सेवा करना, लेकिन वो राजनीति में उलझे हुए हैं।
कैसे न्यायधानी है जबलपुर?
श्री तन्खा ने प्रश्न किया कि हाईकोर्ट की दो खण्डपीठें बना दी गईं, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल भोपाल में खोल दिया, लॉ स्कूल भोपाल में खोल दिया, फिर जबलपुर न्याय की राजधानी कैसे है? उन्होंने कहा कि जो नए ट्रिब्यूनल आ रहे हैं, वो भी भोपाल में खोलने की योजना है, ऐसे में जबलपुर को न तो राजधानी मिली और न ही उसके एवज में मिला हाईकोर्ट विखंडन से बच पाया। इसलिए जरूरी है कि जबलपुर को उपराजधानी बनाया जाए । घर-घर से प्रतिभा का पलायन एक समय शिक्षा का सबसे बड़ा केन्द्र रहा जबलपुर अब पिछड़ क्यों गया है? यह प्रश्न करते हुए श्री तन्खा ने कहा कि यहां से घर-घर से बच्चे पढऩे के लिए बाहर जा रहे हैं। वहां पढ़ाई करने के बाद जबलपुर में उनके स्तर का जॉब नहीं मिलता, इसलिए वे लौटते नहीं। ये एक तरह से प्रतिभा का पलायन है। उन्होंने याद दिलाया कि पहले जब जबलपुर शिक्षा का बड़ा केन्द्र था तो गुजरात और महाराष्ट्र से बच्चे यहां पढऩे के लिए आया करते थे। विदेशी छात्रों की भी बड़ी संख्या हुआ करती थी।
पर्यटन की मार्केटिंग जरूरी
पिछड़ेपन को दूर करने के लिए श्री तन्खा ने पर्यटन को बढ़ावा देने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एक बार वे ग्रीस गए थे, जहां के एक पर्यटक स्थल के बारे में पूरे रास्ते तारीफों के पुल बांधे गए, लेकिन जब वहां पहुंचे तो यह देखकर बड़ी कोत हुई कि ऐसे पर्यटक स्थल तो यहां चारों ओर बिखरे पड़े हैं। श्री तन्खा ने कहा कि यहां के पर्यटन को मार्केटिंग की जरूरत है। इन्वेस्टर्स मीट से रिटर्न क्या? औद्योगिक माहौल बनाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित की गईं इन्वेस्टर्स मीट्स को श्री तन्खा ने अच्छा प्रयास कहा, लेकिन यह प्रश्न किया कि राज्य सरकार बताए कि इससे रिटर्न क्या मिला? जिन लोगों, कॉरपोरेट घरानों और उद्यमियों ने उद्योग लगाने के लिए वादे किए थे, उनके वादों का क्या हुआ?
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