(ब्लूम चौक पर लगा होर्डिंग )
जबलपुर । न्यायालय के आदेश पर होर्डिंग निकालने की कार्रवाई में नगर निगम ने मात्र दिखावा ही किया है। अब तक जितने भी अवैध होर्डिंग निकाले गए हैं वे तो सिर्फ ट्रेलर कहे जा सकते हैं, असली फिल्में तो चौराहों और तिराहों के साथ ही छतों पर चल रही हैं। ऐसे-ऐसे भीमकाय होर्डिंग छतों पर टांगे गए हैं कि नियम और कानून भी होते हैं, इसका अहसास ही मर जाए। होर्डिंग एजेंसियों के सामने लगभग घुटना टेक अधिकारियों ने यह दिखावे की कार्रवाई सिर्फ इसलिए की है, क्योंकि आदेश हाईकोर्ट का था, अब एजेंसियों को लगातार समय दिया जा रहा है, ताकि वे अपना इंतजाम कर लें। ब्लूम चाैक के एक स्ट्रक्चर को एक सप्ताह से निकाला जा रहा है, जबकि किसी गरीब का झोपड़ा तोड़ने भी जेसीबी की मदद ली जाती है। आखिर लोहे के स्ट्रक्चर को उखाड़कर फेंक क्यों नहीं दिया गया।
खुद नगर निगम के ही अधिकारियों का कहना था कि शहर में मात्र 93 अवैध होर्डिंग लगे हैं, जबकि शुरूआत में ही निगम ने 250 से अधिक अवैध होर्डिंग निकाले। इस हिसाब से देखा जाए तो शहर में अवैध होर्डिंगों की संख्या सैकड़ों में है। नगर निगम ने एक नोटिस जारी किया था, जिसके अनुसार चौराहों और तिराहों के केन्द्र से 100 मीटर के दायरे में लगे सभी होर्डिंग अवैध हैं, क्योंकि इससे वाहन चालकों का ध्यान भंग होता है। इस आदेश के तहत सिर्फ 24 घंटों का समय दिया गया था और इसके बाद सभी होर्डिंगों को निकालने के लिए निगम कार्रवाई करने वाला था। 24 घंटों की जगह अब 10 दिनों से भी अधिक का समय हो गया है। आखिर यह क्या हो रहा है, इसी से पता चलता है कि नगर निगम के अधिकारी हाेर्डिंग एजेंसियों के सामने नतमस्तक हो गए हैं और बदले में मिले प्रसाद का मजा ले रहे हैं।
होर्डिंग प्रभारी ही छुट्टी पर
नगर निगम के होर्डिंग प्रभारी अनिल मिश्रा तीन दिनों से शहर से बाहर हैं। इस पूरी कार्रवाई का दायित्व उन्हीं के ऊपर था, पर बीच में ही वे छुट्टी लेकर चले गए, इससे तो यही साबित होता है कि निगम न्यायालय के आदेश को भी पूरी गंभीरता से नहीं लेता। एक नए अधिकारी को होर्डिंग का प्रभार दिया गया है, जो उपायुक्त पद पर हाल ही में शहर आए थे। उन्हें न तो शहर की जानकारी है और न ही होर्डिंग आदि का कार्य उन्होंने पहले किया है।