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संकरे रेल पुल रोक रहे शहर के पहियोें की रफ्तार

7 वर्ष पहले
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जबलपुर. शहर की कुछ सड़कें चौड़ी हो गई हैं और अब ट्रैफिक भी गति पकड़ रहा है, पर शहर को दो हिस्सों में बांटने वाली रेल लाइन के नीचे बने पुल इसकी रफ्तार को कम कर रहे हैं। पुलों के चौड़ीकरण की मांग तो लगातार उठ रही है, पर आज तक उस पर कोई पहल नहीं हो पाई है। चौथा पुल तो इस मामले में सबसे खतरनाक है। यहां अक्सर ही जाम लगता है और लोग घंटों परेशान होते हैं। यही हाल दूसरे पुल का भी है। यहां भी ट्रैफिक का दबाव बढ़ गया है और सड़क चौड़ी हो रही है, पर पुल को चौड़ा करने की दिशा में कोई पहल नहीं की गई। नगर निगम ने रेलवे के अधिकारियाें से चर्चा जरूर की, लेकिन इसके कोई सार्थक परिणाम नहीं निकल पाए।

शहर में रेलवे लाइन अंग्रेजों के समय ही डाली गई थी और तब यहां ट्रैफिक का दबाव न के बराबर था। रेलवे लाइन के नीचे मुख्य रूप से चार पुल बनाए गए, जिनके नीचे से आवाजाही होती है। इन पुलों को पार करके ही मुख्य शहर की ओर जाया जा सकता है। सबसे पहला पुल इंदिरा मार्केट के पास है, जिसे अंधेरा पुल भी कहते हैं। यह तो काफी चौड़ा है और इससे दोनों तरफ आवाजाही होती है। दूसरा पुल पुरानी शीला टाॅकीज के पास है, जो कि काफी सकरा है, यहां अक्सर ही जाम लगता है, क्योंकि यहां से भारी वाहनाें की भी आवाजाही होती है। तीसरा पुल जो कि नागरथ चौक से आगे जाने पर पड़ता है, यह काफी ऊंचा है, इसलिए ट्रक और अन्य बड़े वाहन यहां से आवाजाही करते हैं, पर चौड़ाई के हिसाब से भी इसे पर्याप्त नहीं कहा जा सकता। शहर का सबसे खतरनाक पुल चौथा पुल है। यह केन्ट और शहर की सीमा पर स्थित है, इसलिए यहां भारी आवाजाही होती है। पुल के पहले यानी रसल चौक से पुल तक सड़क करीब 70 फीट चौड़ी है, जबकि पुल के नीचे मात्र 20 से 25 फीट की चौड़ाई ही बचती है। यहां दोपहर से लेकर रात तक कई मर्तबा जाम लगता है, जिससे लोग घंटों परेशान होते हैं।

महापौर ने की थी पहल-
महापौर प्रभात साहू ने चौथा पुल के चौड़ीकरण के लिए रेलवे को पत्र लिखा था और यह मांग भी की थी कि यदि रेलवे चाहे तो निगम खुद ही यह कार्य कराएगा और रेलवे के अधिकारी उस कार्य का बराबर निरीक्षण कर सकते हैं, ऐसा इसलिए, ताकि रेल यातायात पर किसी प्रकार कोई असर न पड़े। महापौर के इस पत्र का रेलवे की ओर से कोई जवाब नहीं आया। अब यह स्थिति है कि इस पुल को बॉटल नेक बोला जाने लगा है और जब लोगों के पास समय होता है, तभी इस मार्ग से आवागमन किया जाता है, क्योंिक जल्दी में यदि इस मार्ग से निकले और जाम लगा मिला तो मुसीबत हो जाती है।
एकजुट होकर करनी होगी मांग
पुलों को चौड़ा करने के लिए सभी को एकजुट होकर पहल करनी होगी, क्योंकि अब राज्य के साथ ही केन्द्र में भी भाजपा की सरकार है और सभी से मतलब भाजपा के सभी नेताओं को इसमें जोर लगाना होगा। किसी एक नेता के कुछ करने से यह कार्य संभव नहीं, इसलिए सभी जब प्रयास करेंगे तो निश्चित ही सफलता मिल जाएगी। जनता को भी आगे आकर अपनी समस्या सामने रखनी होगी और जो परेशानी वर्षों से हो रही है, उसे भी बताना होगा।
नीचे की सड़क जर्जर
इन पुलाें के नीचे की सड़क हमेशा ही जर्जर होती है। पहले पुल के नीचे करीब 6 माह पहले ही सड़क बनाई गई थी, वह भी न्यायालय की फटकार के बाद, इसलिए यहां बेहतर कार्य हुआ और सड़क अभी भी चल रही है। दूसरे, तीसरे और चौथे पुल के नीचे की सड़क बुरी तरह जर्जर हो गई है, जिससे यहां आवाजाही करने में परेशानी होती है।
पुलों पर अतिक्रमणों की भी समस्या
इन पुलों के आसपास अतिक्रमणों की भी समस्या है। चौथे पुल के तो दोनों ही ओर भारी कब्जे हैं। यहां आवाजाही में इसलिए भी परेशानी होती है, क्योंकि पुल के दोनों ओर जो कब्जे हैं, वे सड़क तक आ जाते हैं और कोई एक भी बड़ा वाहन फंस जाता है तो फिर हो जाती है घंटों की समस्या। यहां चाय-पान के टपरों के साथ ही पहले पुल पर सब्जी-फल वाले, दूसरे पुल पर मैकेनिक ताे चौथे पुल पर टपरे वाले परेशान करते हैं। यहां तो पटरियों के किनारे भी कब्जे हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका होती है।
जगह तो है बस इच्छा शक्ति चाहिए
इन पुलों को यदि चौड़ा करने की शुरूआत होती है तो कोई परेशानी नहीं होगी, क्योंकि सभी पुलों के दोनों तरफ पर्याप्त स्थान है। सड़कें भी चौड़ी हैं, बस पुलों को ही चौड़ा करने की जरूरत होगी। चौथे पुल को तो कम से कम 20 फीट चौड़ा करने की जरूरत है, क्योंकि यहां आवागमन करने वालों की संख्या अधिक है।