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359 को जमीन खाली करने नोटिस, मोहनिया से कलेक्ट्रेट तक दिन भर हंगामा

7 वर्ष पहले
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जबलपुर। प्रशासन ने रांझी की मोहनिया पंचायत में शासकीय भूमि पर करीब छह दशक से अतिक्रमण कर मकान बना कर रहने वाले लोगों को नोटिस जारी कर जमीन खाली करने को कहा गया है। सोमवार की सुुबह कलेक्ट्रेट से जब नोटिस मोहनिया पहुंचा तो हंगामें की स्थिति बन गई, लोग हैरान हो गए। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि जिस जमीन पर वो अपने बुजुर्गों के साथ रहते आए हैं, वो जमीनें अचानक कैसे अवैध हो गई।
राजीव गांधी आश्रय योजना में मिला था पट्टा
ग्रामीणों का कहना था कि वर्ष 1998 में राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत मप्र शासन ने मोहनिया पंचायत में रहने वाले लोगों को भूमि का पट्टा दिया था, जिस पर वो लोग वर्षों से मकान बना कर रह रहे हैं। ग्रामीण इस बात से आक्रोशित हैं कि प्रदेश शासन ने सम्मान के साथ उन्हें जो भूमि आवंटित की, आज उसे अवैध बताया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वो इन जमीनों पर करीब 50 से 60 वर्षों से रहते आएं हैं। उनकी बसाहट को वैध करते हुए उन्हें इस भूमि का अधिकार-पत्र आवंटित किया गया।
पेशी के दिन पहुंचा नोटिस

जानकारी के अनुसार न्यायालय तहसीलदार ग्रामीण की ओर से जारी नोटिस में मोहनिया पंचायत, जो नगर निगम सीमा में शामिल हो चुकी है के 359 लोगों को अवैध तरीके से शासकीय भूमि खसरा नं 268 पर कब्जा कर मकान बना कर रहने की बात कही गई है। सभी अतिक्रमणधारियाें को भूमि से संबंधित कागजात लेकर 8 दिसम्बर को न्यायालय में पेश होने को कहा गया। नोटिस को पढ़कर पंचायत के लोगों में हडकंप मच गया। जमीन के कागजात नोटिस मिलते ही तुरंत न्यायालय में पेश करने को लेकर लोगों का आक्रोश फूट पड़ा, लेकिन विरोध करने का कोई फायदा नहीं था। उन्हें अहसास था यदि जमीन के कागजात लेकर आज नहीं पहुंचेे तो उन्हें अपनी ही जमीन से बेदखल होना पड़ेगा।
पहले हटे थे कब्जे

जानकारों का कहना है कि कुछ समय पहले लगी जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने मोहनिया के कब्जों को हटवाने के निर्देश दिए थे, उस समय इर्टों के भट्टे, छोटी दुकानों आदि काे हटाया गया था। उसके बाद एक अन्य याचिका लगने पर इस कार्रवाई को गलत ठहराया गया और इसे कोर्ट की अवमानना माना गया। तब से बेजा कब्जों को हटाने को लेकर रोक लगी हुई है। याचिका में भूमि का सर्वे कराने, वैध-अवैध होने का सत्यापन करने की मांग की गई। जिसके आधार पर न्यायालय ने आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
भूमि का पट्टा है
जब शासन ने 1998 में भूमि का पट्टा आवंटित कर िदया। अब प्रशासन वैध भूमि को क्यों अवैध घोषित करने पर तुला है।
मनोज वंशकार, पिता स्व.दद्दू