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दबाकर बैठ गए पुल चौड़ीकरण योजना, सत्ता बदलने से हुआ बंटाधार

7 वर्ष पहले
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जबलपुर. नौदरा ब्रिज को एक तरफ से तो तत्कालीन महापौर सुशीला सिंह के कार्यकाल में चौड़ा कर दिया गया, लेकिन दूसरी ओर का हिस्सा वर्तमान सत्ता पक्ष के हिस्से में आया और यहीं हो गया बंटाढार। पुल को चौड़ा करने की योजना बनी, ज्योति सिनेमा से जमीन भी मिल गई, इसके बाद भी निगम प्रबंधन हिम्मत ही नहीं जुटा पा रहा है कि इस पुल को चौड़ा किया जा सके। यही हाल बस स्टैण्ड ब्रिज का भी है। यहां तो पूरे दिन भारी वाहनों का जमावड़ा होता है और पुल
के चौड़ा होने से यातायात सुधर सकता है, पर इस तरफ भी कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
नौदरा ब्रिज करीब 10 साल पहले बहुत सकरा था। सबसे पहले यहां के अतिक्रमण पूर्व महापौर विश्वनाथ दुबे के समय हटाए गए। काफी हंगामा हुआ, विवाद भी हुए, पर सब कुछ झेलते हुए भी अतिक्रमण हटे। इसके बाद सुशीला सिंह महापौर बनीं और उन्होंने नौदरा ब्रिज को ओमती की ओर से चौड़ा कर दिया। इससे यातायात में काफी सुधार आया, लेकिन जब भी यहां ट्रैफिक सिग्नल पर भीड़ रुकती है तो यह ब्रिज छोटा लगने लगता है। इसीलिए ज्योति सिनेमा की ओर से ब्रिज को चौड़ा करने की योजना बनाई गई और इसके लिए टॉकीज प्रबंधन से चर्चा भी हो गई, जब सब कुछ तय हो गया तो चौड़ीकरण की योजना को ही दफन कर दिया गया। आज इस योजना का कोई नाम लेने भी तैयार नहीं है। शहर के मध्य स्थित जिस पुल के कारण रोजाना लोगों को परेशानी होती है और जहां पर्याप्त जगह भी है, वहां आखिर चौड़ीकरण की योजना को अंजाम यों नहीं दिया जा रहा है, यह समझ से परे है।
निगम को कोस रही जनता
नगर निगम एक तरह से यातायात का दुश्मन बन गया है। चाहे तीन पक्की चौराहे की रोटरी हो या फिर रानीताल चौक का निर्माण हो। नौदरा ब्रिज का चौड़ीकरण हो या फिर गौमाता चौक का बेतरतीब निर्माण हो। हर तरफ नगर निगम की
खोखली योजनाएं अपनी कहानी खुद ही बयां कर रही हैं। जिन सड़कों पर यातायात को बेहतर किया जा सकता है, वहां पर निगम के अधिकारी ध्यान ही नहीं देते। रसल चौक से एपायर सिनेमा तक सड़क चौड़ी होनी थी, पर आईटी चौक के आगे कार्य ही नहीं हो पाया। यही हाल कई अन्य सड़कों का भी है, जिससे यह पता चलता है कि निगम प्रबंधन यातायात पर ध्यान ही नहीं दे रहा है।
बस स्टैण्ड तिराहे पर नहीं होगा जाम
बस स्टैण्ड के तिराहे पर ही पुल है। इस पुल को एक तरफ से चौड़ा किया जा चुका है और अब ग्रंथालय की ओर भी पर्याप्त जगह है, यहां से भी पुल को चौड़ा किया जा सकता है, इससे मॉडल रोड से जो वाहन बस स्टैण्ड जाने वाले हैं उन्हें बिलकुल सही मोड़ मिलेगा और वे सीधे बस स्टैण्ड या स्टेडियम की ओर जा सकेंगे। पुल चौड़ा होने से यातायात में काफी सुधार होगा, इसीलिए तत्कालीन नगर निगम आयुत एनबीएस राजपूत ने मौके का निरीक्षण किया था और पुल चौड़ीकरण की योजना को फाइनल करने अधिकारियों को सलाह दी गई थी, पर आज तक ऐसा नहीं हो पाया।
पाइप लाइन को बनाया बहाना
पूर्व में नगर निगम अधिकारियों ने पुल से निकली पेयजल लाइनों की सुरक्षा को लेकर बहाना बनाया था और पुल निर्माण से लाइनों के क्षतिग्रस्त होने की आशंका जताई गई थी, पर नीचे से जब एलएंडटी कपनी नाला बना सकती है तो नगर निगम ऊपर से पुल का चौड़ीकरण यों नहीं कर सकता। यहां इतनी जगह है कि पुल को करीब 20 से 25 फीट तक चौड़ा किया जा सकता है।
सड़क तक की योजना बनी थी
बताया जाता है कि ओमती नाले पर स्थित नौदरा ब्रिज से नगर निगम के पीछे होकर बस स्टैण्ड तक दोपहिया वाहनों के लिए सड़क बनाने की भी योजना थी, पर एलएंडटी का नाला इतना मजबूत नहीं लगता कि उस पर आवाजाही की उमीद की जा सके। इसे देखते हुए कहा जा सकता है कि यह सड़क भी गई बट्टे खाते में।