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‘बायपास सिहोरा के बाहर से गुजरे तो सर्वोत्तम'

8 वर्ष पहले
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जबलपुर. राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. 7 के निर्माण में बाधक बन रहे सिहोरा बायपास के निर्माण में टाउन एण्ड कंट्री ह्रश्वलानिंग
के ज्वॉइंट डायरेटर ने पहले के मुकाबले तीसरे विकल्प को बेहतर बताया है। पहले विकल्प में बायपास का कुछ
हिस्सा सिहोरा के भीतर से गुजरेगा, जबकि तीसरे विकल्प में राजमार्ग का निर्माण पूरी तरह से सिहोरा के बाहर से
होगा। टीएनसीपी के ज्वॉइंट डायरेटर द्वारा पेश की गई रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इण्डिया
को अपना पक्ष रखने को कहा है। मामले पर अगली सुनवाई 13 अगस्त को होगी।
गौरतलब है कि नेशनल हाईवे क्र. 7 में आने वाले सिहोरा बायपास के निर्माण को लेकर हाईकोर्ट में दो जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं। एक याचिका सिहोरा निवासी जितेन्द्र श्रीवास्तव की ओर से वर्ष 2011 में और संतोष कुमार चौदहा की ओर से दूसरी याचिका वर्ष 2012 में दायर की गई थी। आवेदकों ने सिहोरा बायपास के निर्माण में हो रहीं अनियमितताओं को चुनौती दी है।
आवेदकों के मुताबिक प्रस्तावित सिहोरा बायपास के लिए एनएचएआई के प्रोजेट डायरेटर ने 16 मार्च 2012 को पहले विकल्प को अपना कर उसे फाइनल कर दिया था। आवेदकों का यह भी आरोप है कि जन सुनवाई में लोगों का बहुमत मिलने को आधार बनाते हुए उसे फाइनल किया गया, जबकि न तो लोगों की ओर से दायर आपिायों का निराकरण किया गया और न ही कृषि भूमि का विधिवत अधिग्रहण किया गया।
आवेदकों का यह भी आरोप है कि बायपास के निर्माण से वे किसान बुरी तरह से प्रभावित होंगे, जो पूरी तरह से खेती पर ही आश्रित हैं। इन आधारों पर मामले में हाईकोर्ट से दखल की राहत चाही गई थी। इस मामले पर हाईकोर्ट ने 16 जुलाई 2013 को टीएनसीपी के ज्वॉइंट डायरेटर को स्थल निरीक्षण करके अपनी रिपोर्ट देने को कहा था।
ज्वॉइंट डायरेटर सीके जाधव की ओर से दी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि मौके का निरीक्षण करने के दौरान उन्होंने पहले और तीसरे विकल्प पर विचार किया। पहले विकल्प के तहत बायपास का कुछ हिस्सा सिहोरा के अंदरूनी क्षेत्र से गुजरेगा। अभी जिस गति से सिहोरा का विकास हो रहा, उसके अनुपात में अगले कुछ वर्षो तक पहले विकल्प के तहत बनने वाले बायपास पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
तीसरे विकल्प को लेकर ज्वॉइंट डायरेटर का कहना है कि उसके तहत बायपास पूरी तरह से सिहोरा के बाहर से गुजरेगा और अगले कई वर्षो तक सिहोरा का विस्तार बायपास की सीमा तक नहीं गुजर सकेगा। ऐसे में तीसरे विकल्प को सवरेाम बताते हुए ज्वॉइंट डायरेटर ने अपनी रिपोर्ट में बायपास के निर्माण को उसी के तहत कराए जाने की सिफारिश की है।
मामले पर हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिववता इितयाज हुसैन, राजेश मेन्दीरा, एनएचएआई की ओर से अधिवता मोहन सौंसरकर, राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवता पीयूष धर्माधिकारी और मप्र राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से अधिवता विक्रम जौहरी हाजिर हुए। रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद युगलपीठ ने एनएचएआई को ज्वॉइंट डायरेटर की रिपोर्ट पर अपना
पक्ष रखने को कहा।