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ड्राइविंग लाइसेंस में खिंचेगी आंखों की फोटो भी, साॅफ्टवेयर हो रहा तैयार

7 वर्ष पहले
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जबलपुर. अब फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोग अपना ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बनवा सकेंगे। इसकी वजह लाइसेंस बनवाते समय उनकी आंखों की पुतलियों की फोटो भी लिया जाना है। अभी यह व्यवस्था मात्र आधार कार्ड बनवाते समय लागू की गई है, बाद में ड्राइविंग लाइसेंस को आधार कार्ड से भी जोड़ दिया जाएगा। नई व्यवस्था शीघ्र ही आरटीओ में शुरू होगी।
अभी जो आवेदक अपना पक्का लाइसेंस बनवाने के लिए कार्यालय जा रहे हैं उनके हाथों की अंगुलियों के प्रिट लिए जाते हैं। पहले मात्र दोनों हाथ के थम्ब इम्प्रेशन से काम चल जाता था, परंतु बाद में उसमें बदलाव कर पूरे हाथ के प्रिंट लेने का कार्य शुरू किया गया। अब उसमें भी पारदर्शिता बरतने के लिए आंखों की पुतलियों की फोटो खींची जाएगी।
साॅफ्टवेयर हो रहा तैयार

आंखों की पुतलियों की फोटो खींचने के लिए एक साॅफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है। इसके द्वारा आवेदक के आंखों की खींची गई तस्वीर परिवहन विभाग के सर्वर पर सेव्ड हो जाएगी। इससे फर्जीवाड़े पर लगाम कसेगी। व्यक्ति के आंखों की फोटो सर्वर पर डालते ही उससे संबंधित सभी जानकारियां चुटकियों में सामने आ जाएंगी।

कुछ को ही पता

अभी तक कार्यालय में लर्निंग लाइसेंस लेने आने वालों की लंंबी-लंबी कतारें नजर आती हैं। अभी कुछ ही लोग ऐसे हैं, जो ये जानते हैं कि लर्निंग लाइसेंस के लिए कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि इसे कहीं भी इंटरनेट के जरिये परिवहन विभाग की वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है। यातायात पुलिस और आरटीओ की कार्रवाई के दौरान भी यह प्रिंट आउट काम आ सकेगा।
डाउनलोड कर रहे लर्निंग लाइसेंस
इन दिनों आरटीओ कार्यालय में आवेदक अपने अपने लर्निंग लाइसेंस लेने कार्यालय के चक्कर नहीं काट रहे हैं, बल्कि घर बैठे उसे कम्प्यूटर से डाउनलाेड कर रहे हैं। इससे उनका समय और पैसे दोनों बच रहे हैं। लाइसेंस बनवाने के बाद उसे तीसरे दिन से डाउनलोड किया जा सकता है। इससे विभाग का पेपर और लेमिनेशन का खर्च भी बच रहा है। साथ ही प्रिंट आउट को संग्रह करके रखने से भी छुटकारा मिल गया है।