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चुटका से रेडिएशन खतरे की संभावना नहीं, वैज्ञानिक डॉ. काकोडकर ने चर्चा में कहा

7 वर्ष पहले
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जबलपुर. चुटका परमाणु बिजली घर से रेडिएशन के खतरे की कोई संभावना नहीं है। लोगों ने भ्रांतियां फैला रखीं हैं, लेकिन हमे जागरुक होने की आवश्यकता है। अभी हम जितनी बिजली का उपयोग कर रहे हैं, भविष्य में इससे 7 गुना ज्यादा िबजली लगेगी। यह बात आज चर्चा के दौरान एटॉमिक एनर्जी कमीशन ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष व परमाणु वैज्ञानिक पद्म विभूषण डॉ. अनिल काकोडकर ने कही।
एक कार्यक्रम में शामिल होने शहर आये श्री काकोडकर ने कहा कि बिजली बनाने में अभी िजतना संसाधान हम यूज कर रहे हैं, यही रफ्तार रही तो आने वाले समय में इसका उपयोग 10 गुना तक बढ़ जाएगा। जिस वस्तु से हम 100 साल तक िबजली बनाते, वह 10 साल में खत्म हो जाएगी, फिर हमें दूसरी वस्तुओं पर निर्भर रहना पड़ेगा। उन्होंने कहा िक बिजली अब जीवन का अहम हिस्सा बन गई है, इसके बिना जीवन संभव ही नहीं है, इसलिये अभी से सतर्क होना जरूरी है।
परमाणु ऊर्जा जरूरी

बिजली की उपलब्धता 5 हजार यूनिट प्रति व्यक्ति की आवश्यकता है। श्री काकोडकर ने कहा कि हमें सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा पर निर्भर होना होगा। चुटका परमाणु बिजलीघर जो लगाया जा रहा है, इसकी आज जरूरत है। भारत ने पहले ही प्रयास में मंगल के मिशन में कामयाबी हासिल की है। यह सभी के लिये बड़ी उपलब्धि है। इस दौरान परमाणु वैज्ञानिक डॉ. एसके मल्होत्रा, डॉ. जितेन्द्र जामदार की उपस्थिति रही।