जबलपुर. हाईकोर्ट ने उस जनहित याचिका का निराकरण कर दिया, जिसमें रेलवे द्वारा डिस्पोजल कपों में राष्ट्रीय चिन्ह लगाकर उसका उपयोग किए जाने को चुनौती दी गई थी। जस्टिस केके लाहोटी और जस्टिस रोहित आर्या की युगलपीठ के सामने रेलवे की ओर से बयान दिया गया कि संदर्भित कपों से अशोक चिन्ह पूरी तरह से हटा लिया गया है।
इस बयान पर हाईकोर्ट ने मामले पर आगे सुनवाई से इनकार करते हुए मामले का पटाक्षेप कर दिया। यह याचिका केन्टोन्मेंट खालसा में स्पोट्र्स टीचर के पद पर पदस्थ शिल्पा स्थापक की ओर से दायर की गई थी। आवेदक का आरोप था कि भारतीय रेलवे द्वारा यात्रियों को उपलध कराए जा रहे डिस्पोजल कपों में राष्ट्रीय चिन्ह अशोक चिन्ह का इस्तेमाल किया गया है।
आरोप था कि उपयोग होने के बाद यात्री उन डिस्पोजलों को फेंक देते हैं, जो बाद में लोगों के पैर के नीचे कुचले जाते हैं। ऐसे में राष्ट्रीय चिन्ह का अपमान होता है। इस बारे में सक्षम अधिकारियों से शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर यह याचिका दायर की गई। याचिका पर हाईकोर्ट ने पूर्व में रेलवे को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे। मामले पर हुई सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से दिए बयान को मद्देनजर रख युगलपीठ ने मामले का पटाक्षेप कर दिया।