जबलपुर. व्यापमं घोटाले की जांच सीबीआई से कराए जाने के संबंध में दिग्विजय सिंह व अन्य की याचिकाओं पर हाईकोर्ट में एसटीएफ ने सीलबंद लिफाफे में अपना जवाब पेश कर दिया है। यह जवाब पिछली सुनवाई पर याचिकाकर्ताओं की ओर से जांच से जुड़े कुछ सवालों को लेकर पेश किया गया है। चीफ जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस आलोक अराधे की युगलपीठ ने जवाब रिकाॅर्ड पर लेने के बाद मामले पर 7 अक्टूबर को सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट में ये याचिकाएं राज्यसभा सांसद और मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, जबलपुर के पार्षद पंकज पाण्डेय, राजेश सोनकर, भोपाल के पीसी शर्मा, ग्लेन पॉल और डॉ. कमलेश वर्मा की ओर से दायर की गई हैं। इन मामलों में व्यापमं घोटाले की जांच एसटीएफ से कराए जाने को कटघरे में रखते हुए जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को दिए जाने की राहत चाही गई है।
इस मामले पर बीते गुरुवार को भारत के पूर्व एडीशनल सॉलिसिटर जनरल विवेक कृष्ण तन्खा ने एसटीएफ द्वारा की जा रही जांच की विसंगतियों को रेखांकित करते हुए दो दस्तावेज युगलपीठ के सामने पेश किए थे। उन्होंने जांच को लेकर आपत्तियां उठाते हुए मामला सीबीआई को सौंपे जाने की राहत चाही थी। इस पर युगलपीठ ने एसटीएफ को कहा था कि वह सीलबंद लिफाफे में अपना जवाब पेश करे, ताकि इस मामले की गोपनीयता बरकरार रह सके।
मामले पर सोमवार को सुबह साढ़े दस बजे एसटीएफ की ओर से सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट को रिकाॅर्ड पर लेने के बाद युगलपीठ ने मामलों की सुनवाई ढाई बजे से करने के निर्देश दिए। इसके बाद जवाब काफी विस्तृत होने के कारण युगलपीठ ने सुनवाई अब 7 अक्टूबर को करने के निर्देश दिए। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से भारत की पूर्व सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जय सिंह, पूर्व एडीशनल सॉलिसिटर जनरल विवेक कृष्ण तन्खा और राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता आरडी जैन, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता नागेश्वर राव और शासकीय अधिवक्ता समदर्शी तिवारी हाजिर हुए।