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बनकर तैयार हुआ तो छत टपकने लगी, आईसीसीयू और रिकवरी बेड के भरोसे काम

8 वर्ष पहले
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जबलपुर. मेडिकल कॉलेज अस्पताल में गहन चिकित्स सेवाओं में और विस्तार हो सके, इसके लिए निश्चेतना विभाग से जुड़े हुए आईसीयू को और अपग्रेड करने का निर्णय लिया गया। इस काम को कुछ माह में क[1]ह्रश्वलीट करने का भरोसा दिया गया, लेकिन कुछ माह और दिनों का काम दो साल में भी पूरा बेहतर ढंग से पूरा नहीं हो सका।

बताया जाता है कि एनीस्थीशिया विभाग से जुड़ा आईसीयू जब कुछ माह पहले बनकर तैयार हुआ तो इस बारिश में इसके कमरों की छत से पानी टपकने लगा और दीवारें पानी से नहा गईं। जब यह जानकारी जब इसको चालू करने कावाब देख रहे विभाग के चिकित्सकों को लगी तो निराशा हुई और आईसीयू का इंतजार कुछ दिन और बढ़ गया। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में वैसे गंभीर रोगियों के लिए आईसीसीयू और कुछ विभागों में रिकवरी बेड हैं, लेकिन यदि पुराना आईसीयू बनकर जल्द तैयार हो जाए तो मरीजों को और बेहतर सेवाएं मिलना स्वाभाविक है।

इस आईसीयू के बनने से निश्चेतना विभाग में जहां संसाधन में बढ़ो ारी होगी, वहीं गंभीर रोगियों के लिए 6 अतिरित बेड भी मिलेंगे। निश्चेतना विभाग के जूनियर डॉटरों और जो भी उपलध चिकित्सक हैं, उनकी सेवाएं इस आईसीयू में ली जाएंगी। हर हाल में इस आईसीयू के चालू होने से गंभीर रोगियों को फायदा होगा, योंकि अब जो अपग्रेडेशन किया जा रहा है, उसमें चिकित्सकों का ड्यूटी रूम और वेटिंग रूम भी है। इसमें बैठकर चिकित्सक अपनी सेवाएं मरीजों को बेहतर ढंग से दे सकते हैं। इससे पहले के आईसीयू में यह सुविधाएं नहीं थीं।

हमें मिलते ही होगा चालू

आईसीयू न चालू होने से भी मरीजों को कोई उतनी परेशानी नहीं है, इसके पर्याप्त विकल्प हैं। यह तैयार हो रहा आईसीयू अतिरि[1]त और एडवांस होगा, जिसका सीधा फायदा मरीजों को मिलेगा। हमें लोक निर्माण विभाग से जैसे ही यह अधिकृत तौर पर मिलता है, हम इसे चालू कर देंगे।

-डॉ. आशीष सेठी, निश्चेतना विभाग प्रमुख