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डाउनलोड करेंजबलपुर. मेडिकल कॉलेज अस्पताल में खाली पड़े चतुर्थ और तृतीय श्रेणी के 300 से अधिक पदों पर नियुितयां चार साल से नहीं हो पा रही हैं। किसी न किसी कारणवश यह नियुक्ति प्रक्रिया अटक जाती है। हाल ही में कॉलेज प्रबंधन ने व्यावसायिक परीक्षा मण्डल के माध्यम से खाली पड़े पदों को भरने का विचार बनाया। इसके लिए व्यापमं से कहा गया कि वो इस नियुित प्रक्रिया में सहभागी बने और टेस्ट लेकर नियुक्ति संबंधी कार्रवाई कर दे।
मेडिकल प्रबंधन के इस आग्रह पर व्यापमं ने कहा है कि वह इस प्रकार की किसी ाी प्रक्रिया में ाग लेना नहीं चाहता। व्यापमं के पास वैसे ही पहले से और जि[1]मेदारियां हैं, इसलिए मेडिकल प्रबंधन नियुित प्रक्रिया खुद स[1]भाले।
व्यापमं के उार के बाद अब मेडिकल प्रबंधन विचार कर रहा है कि चतुर्थ और तृतीय श्रेणी कर्मचारियों की नियुितयां कैसे की जाएं। वैसे इन नियुितयों को लेकर भोपाल से लगातार सवाल किये जा रहे हैं। डायरेटर मेडिकल एजुकेशन जवाब मांगते हैं कि जब पद दिये गये हैं और खाली पड़े हैं तो उनमें नियुितयां यों नहीं की जाती हैं।
इसका जवाब यहां से गोलमोल तरीके से भेज दिया जाता है। विभाग के उच्च अधिकारी फिर भी किसी न किसी उार से संतुष्ट हो जाते हैं, लेकिन कर्मचारी संघों और कैजुअल लेबर एसोसिएशन के पदाधिकारियों को समझाना कठिन है। हर कुछ दिन में कर्मचारियों की भर्तियां नहीं किये जाने को लेकर संघ सवाल उठा रहे हैं। इस पूरे मामले को लेकर डीन डॉ. एलपी वर्मा से स[1]पर्क किया गया, लेकिन बात संभव नहीं हो सकी।
नियु[1]ितयों को लेकर दबाव- लोकल स्तर पर ऑफर बुलाकर कोई भी प्रबंधन से जुड़ा अधिकारी नियु[1]ितयां करने के पक्ष में नहीं है। इसका कारण है कि रि[1]त पदों को भरने के लिए राजनीतिक दबाव को सहन करना कठिन होगा।
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