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लोक गीत गाते हुए शादी की खरीदी करने आ रहे ग्रामीण

5 वर्ष पहले
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आदिवासी समाज में विवाह समारोह की धूम से बाजार में खरीदारों की भीड़ बढ़ गई है। कपड़े, बर्तन और चांदी के गहनों की जमकर खरीदी हो रही है। इससे व्यापारियों के चेहरे भी खिल उठे हैं।

लोक गीत गाते हुए ग्रामीणों की टोलियों ने बाजार को गुलजार कर दिया है। कपड़े, ज्वेलरी, बर्तन के साथ फर्नीचर व इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ लगी है। महंगाई के बावजूद ग्रामीण शादी-ब्याह की खरीदी को लेकर कोई समझौता नहीं कर रहे हैं।

आदिवासी समाज में विवाह समारोह की शुरुआत हो गई है। यह सिलसिला अब करीब चार महीने तक चलेगा। शादी-ब्याह के लिए ग्रामीण अपनी परंपरा का अनुशरण करते हुए समूह के रूप में खरीदारी के लिए पहुंच रहे हैं। इससे आम दिनों में भी हाट बाजार सा आभास हो रहा है। ग्रामीणों की माने तो भगोरिया के बाद शादियों का सिलसिला और तेज हो जाएगा। दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों से बरातें वाहनों के काफिले के साथ निकल रही है। शहर से लगे गांवों की बरातें तो डीजे की धुन पर निकल रही है। इसमें आदिवासी नृत्य की अल्हड़ मस्ती भी दिखाई दे रही है। सराफा व्यापारियों के अनुसार अमूमन ग्रामीण चांदी के गहने ही खरीदते हैं। वक्त के साथ अब कुछ बदलाव आया है। शादी-ब्याह में शगुन के बतौर सोने के गहने भी लिए जा रहे हैं। सोने-चांदी के आसमान छूते दामों के बावजूद इनका आकर्षण कम नहीं हुआ है। सीजन में कारोबार ठीकठाक होने की उम्मीद है।

शादी-ब्याह के लिए इस बार पारंपरिक कपड़ों के साथ पेंट-शर्ट और साड़ियों की भी जमकर खरीदी हो रही है। खरीदारी के लिए आने वाले दूल्हा-दुल्हन भी अब आधुनिक वेशभूषा में ही नजर आ रहे हैं।

गहने और कपड़ों के बाद सबसे अधिक कारोबार बर्तनों का हो रहा है। स्टील के बर्तनों के साथ शगुन बतौर तांबे व पीतल के बर्तन भी लिए जा रहे हैं। शहर के सभी बर्तन विक्रेताओं के यहां खरीदी के लिए ग्रामीण दिखाई पड़ रहे हैं। जबकि फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक आइटम की भी मांग बनी हुई है।

रंग-िबरंगी चूड़ी पहनती महिलाएं।

शादी के लिए कपड़े की खरीदी करते ग्रामीण ।

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