पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • आदिवासी तैयार कर रहे हैं देशी मसाले, दिल्ली तक धूम

आदिवासी तैयार कर रहे हैं देशी मसाले, दिल्ली तक धूम

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
झाबुआ। पारंपरिक घट्टी खल-बट्टे पर पीसी हुई दाल और मसाले। किसी तरह की मिलावट नहीं। इन देशी दाल-मसालों को आसपास के शहरों ही नहीं, दिल्लीवालों ने भी अपने दिल में जगह दी है। इसका जायका ही कुछ ऐसा है कि कोई एक बार खा ले तो वह उसका स्वाद कभी भूल नहीं पाता। इनकी कीमत बाजार से पांच से 10 फीसदी ज्यादा है। इसके बावजूद इनकी डिमांड बढ़ती ही जा रही है।

शहर से नौ किमी दूर छोटे से गांव नरवालिया की महिलाओं ने गैस अथारिटी ऑफ इंडिया (गैल) के सहयोग से स्व सहायता समूह बनाया है। जो दाल और मसाले बनाने का काम करता है। समूह से 20 महिलाएं जुड़ी हैं। कुछ घट्टी घुमाते हुए दाल तैयार करती हैं। वहीं कुछ महिलाओं के हाथ में खल-बट्टे होते हैं। वे मसालों को कूटकर व्यवस्थित करती हैं। फिर इन्हें अपना ट्रेडमार्क ‘जलधर’ लगाकर बाजार में लाया जाता है ताकि मेहनत का मूल्य मिल सके।
ये सब करते हैं तैयार
चनादाल, मूंग दाल, तुवर दाल, गरम मसाला, हल्दी पावडर, मिर्च पावडर धनिया पावडर।

दाम ज्यादा, फिर भी डिमांड
रेट लिस्ट (प्रति किलोग्राम)
वस्तु कीमत बाजार मूल्य
तुवरदाल 100 80-85
मूंगदाल 105 90-100
चनादाल 80 45
हल्दीपावडर 200 150
धनियापावडर 200 200
लालमिर्च 210 160
गरममसाला 800 400

अबआउटलेट खोलने की तैयारी : बुजुर्ग महिला थावरीबाई और सेवलीबाई बताती हैं कि अब शहर में एक आउटलेट खोलने की तैयारी है।
घट्‌टी से दाल तैयार करने के बाद उसकी पैकिंग में जुटी महिलाएं।