महेश्वर (खरगोन) | यहां के श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर में श्रद्धालु एक महीने से गोमूत्र का सेवन कर रहे हैं। सुबह चाय की प्याली की जगह प्रसाद में बतौर गोमूत्र पी रहे हैं। यहां के पुजारी रिटायर्ड इंजीनियर पं. बालकृष्ण शर्मा प्रतिदिन गोमूत्र जुटाते हैं और श्रद्धालुओं को इसके फायदे गिनाकर उन्हें प्रसाद के रूप में पिलाते हैं। श्रद्धालुओं के साथ स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता रखने वाले लोग भी मंदिर में जुटने लगे हैं। श्री शर्मा मंदिर परिसर में योग क्रियाएं कराते हैं और गाेमूत्र से स्वास्थ्य लाभ के साथ नए लोगों को सेवन का तरीका बताते हैं। उसके बाद सभी गोमूत्र का प्याला उठाते हैं।
फिलहाल मंदिर में प्रतिदिन 20 से 25 श्रद्धालु गोमूत्र का सेवन कर रहे हैं। पं शर्मा को यह प्रेरणा योग गुरू बाबा रामदेव के सहयोगी स्व. राजीव दीक्षित की सीडी और किताबों से मिली। उन्होंने बताया 8 परत वाले सूती कपड़े में ताजे गोमूत्र को छानकर प्रतिदिन 30 से 50 ग्राम सुबह खाली पेट नियमित सेवन करने से शरीर स्वस्थ रहता है। यह वात, पित्त और कफ तीनों का शरीर में संतुलन बनाए रखता है।
रोज जुटाते हैं 5-6 लीटर गोमूत्र :शहरके दर्जनभर गोपालकों से प्रतिदिन आधा-आधा लीटर गोमूत्र जुटाया जाता है। पांच-छह लीटर गोमूत्र को छानकर प्यालों में भरा जाता है। बड़े श्रद्धालुओं को 50 छोटों को 25 ग्राम गोमूत्र प्याले में भरकर दिया जाता है।
आयुर्वेदिकऔषधि है गोमूत्र : धार्मिक मान्यता के अनुसार गोमूत्र में आयुर्वेद के भगवान धनवंतरि का वास माना गया है। विज्ञान ने भी शोध में गोमूत्र को आयुर्वेद की महाऔषधि सिद्ध किया है। आयुर्वेद के पितामह महर्षि चरक के शिष्य वागभट्टाचार्य ने गोमूत्र को 148 प्रकार के रोगों की महाऔषधि बताया है। हमारे शरीर में 18 पोषक तत्व होते हैं। इनकी कमी से शरीर रोगी होता है। ये तत्व मिट्टी और गोमूत्र में होते हैं। लखनऊ की सेंट्रल ड्रग सिस्टम इंस्टीट्यूट में 8 माह के शोध में यह सही पाया गया।
जरा हटकर : एक गोमूत्र की प्याली हो...
सेहत के प्रति संवेदनशील महेश्वर के खेड़ापति हनुमान मंदिर के पुजारी की अनूठी साधना ।
(श्रद्धालु को प्याली में गोमूत्र बांटते हुए पं. बालकृष्ण शर्मा।)