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एक ही दुकान पर 14 मूकबधिर कर रहे काम, वीडियो चैट के जरिए होती है बात

7 वर्ष पहले
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(अपने साथियों से वीडियाे चेटिंग करता इकबाल। )
खरगोन। मूकबधिर थे इसलिए कोई नौकरी पर नहीं रखता था। पढ़े-लिखे होने के बावजूद बेरोजगार भटकते रहे। एक दिन एक फ्लैक्स एडव्हरटाइजिंग दुकानदार ने साफ-सफाई के लिए पार्ट टाइम पर रखा। आगे बढ़ने की ललक थी। धीरे-धीरे कम्प्यूटर पर हाथ आजमाया। आज एड की हर विधा में महारथी हैं। अब नौकरी देने के लिए शहर के बड़े दुकानदार ऑफर दे रहे हैं। और अपने जैसे दूसरे 12 साथियों को भी रोजगार पर रखा है। आज एक साथ एक दुकान पर 14 मूकबधिर काम कर रहे हैं। यह कहानी है शहर दो मूकबधिर युवकों की जिन्होंने इसकी शुरुआत की।
शहर के राधावल्लभ मार्केट में एड डिजाइनिंग का काम करते हैं दोनों मूकबधिर। दो साल पहले शहर के संजय नगर निवासी इकबाल इस्माइल खान भावसार मोहल्ला के मंगेश गावशिंदे ने निजी फ्लैक्स एडव्हरटाइजिंग दुकान पर पार्ट टाइम साफ सफाई का काम शुरू किया। धीरे-धीरे कम्प्यूटर पर हाथ जमाया। अब अपने 12 अन्य मूकबधिर साथियों को भी पार्ट टाइम रोजगार पर रखे हैं। करीब डेढ़ साल पहले धर्म-जाति का भेद भुलाकर निमाड़ मूकबधिर संगठन चला रहे हैं। रजिस्ट्रेशन कर संगठन में 50 से ज्यादा लोगों को शामिल कर भी चुके हैं। बात समझाने के लिए वे थ्रीजी वीडियो चेट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल भी करते हैं।

शहर और आसपास के गावों के हैं सभी मूकबधिर युवक
संचालकमहेश रघुवंशी ने बताया इकबाल कम्प्यूटर पर जॉब डिजाइन तैयार करता है और मंगेश मशीन की ऑपरेटिंग। दोनों के बीच तालमेल से इशारों में काम पूरा होता है। दोनों को 3500 रुपए प्रतिमाह वेतन मिलता है।
उनके साथ जैतापुर निवासी रमेश गोपाल चौहान, हुजैफा सैफुद्दीन मोरुरवाला, ठीबगांव का सुरेश आनंदराम यादव, गोगांवा का राहुल अशोक गुप्ता, बड़गांव का रविंद्र रमेश चौहान, पुरानी सब्जी मंडी निवासी सुनील सुभानसिंह डाबर, पंधानिया का सुनील नानाजी कोगले, संजय नगर के मोइन मंजूर खान, असद मंजूर खान, घनश्याम शुक्ला, शहबाज ईस्माईल रमेश सखाराम सोलंकी पार्ट टाइम जॉब करते हैं। काम के हिसाब से 50% कमिशन देते हैं। इस हिसाब से ये 1000-3000 रुपए प्रतिमाह तक कमाई कर लेते हैं। सभी के काम की फिनिशिंग देखकर ग्राहक चौंक जाते हैं।

कमजोरी बनी प्रेरणा साफ सफाई के काम से स्मार्ट फोन से थ्रीजी चैटिंग
12वींतक पढ़े इकबाल ने बताया दो साल पहले तक कई जगह काम तलाशा। साथियों ने चाय बनाने से लेकर मजदूरी करने की कोशिश की। बड़े दुकानदारों से काम भी मांगा। लेकिन शारीरिक परेशानी से कोई काम नहीं देता। यही कमजोरी प्रेरणा बनी। पार्ट टाइम एड कंपनी में साफ सफाई का काम मिला। धीरे-धीरे कम्प्यूटर मशीन ऑपरेट करना सीखा। अपने जैसे युवकों को साथ में शामिल किया।
अब सभी युवकों के पास स्मार्ट फोन है। इसमें थ्रीजी सुविधा है। यह आपस में वीडियो चैटिंग कर इशारों से बात करते हैं। जिन युवकों को पढ़ना आता है उन्हें मैसेज देकर भी काम चल जाता है। हाल ही में जिला पंचायत में हुए विभिन्न विभागों सरकारी नौकरी के लिए भी सभी ने इंटरव्यू दिया।

दो साल पहले दो युवकों को दुकान की साफ-सफाई का मिला था काम, आज वहीं पर अपने जैसे 12 युवकों को दे रहे रोजगार, मूक-बधिर संगठन भी चला रहे ।