(अपने साथियों से वीडियाे चैटिंग करता इकबाल।)
खरगोन. मूकबधिर थे इसलिए कोई नौकरी पर नहीं रखता था। पढ़े-लिखे होने के बावजूद बेरोजगार भटकते रहे।
एक दिन एक फ्लैक्स एडवरटाइजिंग दुकानदार ने साफ-सफाई के लिए पार्ट टाइम पर रखा। आगे बढ़ने की ललक थी। धीरे-धीरे कम्प्यूटर पर हाथ आजमाया। आज एड की हर विधा में महारथी हैं। अब नौकरी देने के लिए शहर के बड़े दुकानदार ऑफर दे रहे हैं और अपने जैसे दूसरे 12 साथियों को भी रोजगार पर रखा है। आज एक साथ एक दुकान पर 14 मूकबधिर काम कर रहे हैं। यह कहानी है शहर के दो मूकबधिर युवकों की, जिन्होंने इसकी शुरुआत की।
शहर के राधावल्लभ मार्केट में एड डिजाइनिंग का काम करते हैं दोनों मूकबधिर। दो साल पहले शहर के संजय नगर निवासी इकबाल इस्माइल खान भावसार मोहल्ला के मंगेश गावशिंदे ने निजी फ्लैक्स एडवरटाइजिंग दुकान पर पार्ट टाइम साफ सफाई का काम शुरू किया। धीरे-धीरे कम्प्यूटर पर हाथ जमाया। अब अपने 12 अन्य मूकबधिर साथियों को भी पार्ट टाइम रोजगार पर रखे हैं।
करीब डेढ़ साल से जाति और धर्म का भेद भुलाकर निमाड़ मूकबधिर संगठन चला रहे हैं। रजिस्ट्रेशन कर संगठन में 50 से ज्यादा लोगों को शामिल कर भी चुके हैं। बात समझाने के लिए वे थ्रीजी वीडियो चैट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल भी करते हैं।
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