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घटिया बीज, सोयाबीन से ज्यादा उगी घास 1900 में मवेशियों को चरने दिया खेत

7 वर्ष पहले
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मूंदी। मूंदीके एक किसान ने डेढ़ एकड़ जमीन में सोयाबीन बोया। अब तक इस पर 10 हजार रुपए खर्च किए लेकिन घटिया बीज और मौसम की बेरुखी के चलते सोयाबीन से ज्यादा घास उग आई। अब घास उखाड़ने में पैसा खर्च करने के बजाए किसान ने 1900 रुपए में अपना पूरा खेत पशु चराने के लिए दे दिया।
किसान का मानना है कि 10 हजार रुपए तो डूब गए। कम से कम 1900 रुपए तो हाथ लग जाएं। नगर से सटे गाेदबेड़ी के किसान रायचंद राठौर ने बताया उन्होंने खेत तैयार करने से लेकर बोवनी, निंदाई कीटनाशक छिड़काव पर 10 हजार रुपए खर्च किए। इस बीच लगातार पानी बरसा तो बतर नहीं मिल सकी।
खेत में फसल ने उतनी बढ़त नहीं की जितनी खरपतवार फैल गई। नींदानाशक का उपयोग भी किया लेकिन कोई फायदा नहीं मिला। फसल आशानुकूल नहीं होने से उसकी कटाई महंगी पड़ती। इसके चलते उन्होंने पड़ोसी बालू पिता बाबूलाल गुर्जर को खेत पशु चराने के लिए दे दिया। इसके एवज में उन्हें केवल 1900 रुपए मिले। लागत से कम मिलने पर रायचंद निराश तो हैं लेकिन उन्हें इस बात का सुकून है कि रबी सीजन के लिए खेत तैयार करने में उन्हें ज्यादा फजीहत नहीं झेलनी पड़ेगी।

क्षेत्र में कई किसानों के साथ भी ऐसी ही स्थिति
लगातारबारिश और गुणवत्ताहीन बीज के चलते क्षेत्र के कई गांवों में सोयाबीन फसल चौपट हो गई है। मुनाफा तो दूर किसानों को लागत मूल्य मिलना मुश्किल है। ऐसे में खेत को मवेशियों के सुपुर्द करने के सिवाए उनके पास कोई चारा नहीं।
घटिया बीज के कारण सोयाबीन से ज्यादा उगी घास 1900 रुपए में मवेशी चराने के लिए दे दिया खेत ।
मुसीबत में अन्नदाता |मूंदी के किसान ने डेढ़ एकड़ रकबे में 10 हजार रुपए खर्च कर सोयाबीन की बोवनी की लेकिन बीज ने धोखा दे दिया, सोयाबीन से ज्यादा घास उग आई, और राशि खर्च कर फसल बचाने के बजाए खेत को बना दिया चारागाह
(रायचंद राठौर के खेत को 1900 रुपए में लेने के बाद घास काटते बालू गुर्जर।)