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ईको टूरिज्म से चमकेगी कालीभीत की सुंदरता
कालीघोड़ी के जंगल से भावेश अतुलकर (खंडवा)
सतपुड़ापर्वतमाला के आंवलिया जंगल की पूर्व कालीभीत रेंज जल्द ही ईको टूरिज्म से चमकेगी। पहले चरण में 62.50 लाख रुपए से पर्यटन स्थल विकसित किए जा रहे हैं। ईको फ्रेंडली ट्री हाउस, फ्लाइंग फोक्स (रोप वे), पर्यटन मार्ग, नेंचरट्रेल वॉच टॉवर सहित कई काम पूरे हो चुके हैं। जल्द ही बचे काम भी पूरे हो जाएंगे। सागौन के लिए पहचाने जाने वाले कालीभीत के घने जंगल में कलकल करते झरने सहित अन्य प्राकृतिक स्थलों का आनंद पर्यटक मार्च 2015 से ले सकेंगे। हालांकि अभी भी यहां पर्यटक पहुंच रहे हैं। वन अफसरों के मुताबिक ओंकारेश्वर-महेश्वर सहित अन्य शहरों से आने वाले पर्यटकों के लिए सुविधाएं जुटाई जा रही हैं। वन विभाग के प्रयास से सिर्फ इन स्थलों को नया जीवन मिल सकेगा, बल्कि वन विभाग के लिए आय का माध्यम भी बनेगा। शेषपेज 6
खंडवा. गौंड राजा के शासनकाल में शिव मंदिर के सामने बना यह तालाब पूरी तरह सूख गया था। वन विभाग ने इसे पुन: जीवित कर मछली पालन शुरू किया। यह अब आकर्षण का केंद्र बन गया है।
जंगल में तैयार हो गए हैं रास्ते
^आंवलियाके पूर्व कालीभीत जंगल में ईको टूरिज्म के तहत पर्यटन स्थल विकसित किए जा रहे हैं। यहां आने-जाने के लिए मार्ग तैयार कर दिए गए हैं। मार्च 2015 से पर्यटक यहां प्राकृतिक स्थलों का आनंद ले सकेंगे। -पंकज श्रीवास्तव, सीसीएफ,खंडवा
यहां तक ऐसे पहुंच सकेंगे पर्यटक
पर्यटकआंवलिया ईको टूरिज्म स्थल पहुंचने के लिए 80 किमी सड़क मार्ग की दूरी तय करना होगा। खंडवा से 41 किमी दूर आशापुर माता मंदिर और यहां से बैतूल मार्ग पर 39 किमी की दूरी पर आंवलिया वनग्राम जा सकते हैं। वहीं, इंदौर के पर्यटक सड़क मार्ग से 133 किमी, मीटरगेज ट्रेन से भी खंडवा सकते हैं। फिर यहां से सड़क मार्ग के जरिए ईको टूरिज्म स्थल तक जा सकते हैं।
ये स्थल कर रहे आकर्षित
ट्री-हाउस,फ्लाइंग फोकस (रोप-वे), पहाड़ियों से गुजरने के लिए संकरा रास्ता, बारह जोशी नाले से झिरपा के बीच घुमावदार रास्ते, कालीघोड़ी में प्राचीन गौंड राजा का किला, शिव मंदिर की आकर्षक नक्काशी, मोतीगढ़ पहाड़ में पेगोड़ा, बर्मा ब्रिज, नेंचरट्रेल, बेलादेव जंगल में ऊंचे वॉच टॉवर पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।
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