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भाषाई राजनीति से हिंदी नहीं बन सकी राष्ट्रभाषा
वर्ष1965 से हिंदी राष्ट्रभाषा बनने के लिए संघर्ष कर रही है। कुछ नेताओं की जाति भाषा की राजनीति के कारण हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं बन पाई है। यह बात जेसीआई के हिंदी दिवस सम्मान समारोह एवं व्याख्यान में मुख्य वक्ता डॉ. संध्या गंधे ने कही। अंग्रेजी की परतंत्रता विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हमें अपने बच्चों को अंग्रेजी तो पढ़ानी है पर उन्हें हिंदी का महत्व भी बताना है। इससे पहले बोलते हुए मुख्य अतिथि एसपी मनोज शर्मा ने हरिवंश राय बच्चन का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने के बाद हिंदी राजभाषा विभाग में नौकरी की। कपास अनुसंधान केंद्र के डॉ. पीपी शास्त्री ने कहा स्पेन, जापान, रूस ने अपनी भाषाओं के साथ आगे बढ़े। वहां अंग्रेजी की अनिवार्यता नहीं है। हमारे यहां आज भी कई क्षेत्रों में अंग्रेजी की अनिवार्यता का भ्रम है। हमें इस भ्रम से निकलना होगा।
सम्मान समारोह में उपस्थित लोगों को संंबधित करते हुए डा. पीपी शास्त्री मंच पर बैठे अतिथि गण।