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इत्र संयंत्र बंद, शासन स्तर पर होंगे टेंडर

5 वर्ष पहले
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वनमंत्री रहते हुए विजय शाह द्वारा आंवलिया में शुरू कराया गया इत्र संयंत्र फिर बंद हो गया है। इंदौर की कंपनी ने एक साल में ही हाथ खींच लिए। 2015 में टेंडर के माध्यम से कोहेकाफ महक संस्था ने लीज पर यह संयंत्र लिया था। संस्था लीज रेंट भरती रही। फिर उसने अपना सामान समेटना शुरू कर दिया है। टेंडर के मुताबिक शासन ने उसे अनुमति भी दे दी है। अब वनोपज संघ प्रदेश स्तर पर इस संयंत्र को चलाने के लिए टेंडर जारी करेगा।

आंवलिया में यह संयंत्र विजय शाह के वनमंत्री रहते हुए वनोपज संघ के माध्यम से शुरू कराया था। अब मंत्री शाह और अफसरों ने जिले की जनता को खूब सब्जबाग दिखाए थे। करीब 25 लाख से ज्यादा रुपए खर्च करने के बाद पहले इसे प्रयोग के तौर पर चलाया। 2011 में लघु वनोपज संघ खंडवा और कुवैत की फर्म मोहम्मद यूसुफ बेह-बेहानी के बीच 50 किलो मिट्टी का इत्र भेजने का करार हुआ है। यहां दो बूंद इत्र भी नहीं भेजा जा सका। संयंत्र चलाने के लिए फूलों की खेती के लिए वनवासियों को प्रशिक्षण भी दिया। कन्नौज से भी कारीगर आए। हासिल कुछ नहीं हुआ। तत्कालीन सहायक वन संरक्षक आरके मिश्रा और मंत्री विजय शाह ने इस संयंत्र को खड़ा किया था, लेकिन चला नहीं पाए।

स्थान चयन ही गलत
वन अफसरों के मुताबिक संयंत्र लगाने का स्थान ही गलत है। काम करने के लिए कर्मचारी तक नहीं मिलते हैं। बिजली नहीं है। कच्चा माल भी नहीं है। मनरेगा, सस्ता अनाज की योजनाओं के कारण मजदूर नहीं मिलते। इस कारण संयंत्र चलाना मुश्किल हो रहा है।

सामग्री उठाने की मंजूरी दी
इंदौर की संस्था ने काम बंद करने की इजाजत मांगी थी। हमने टेंडर की शर्तों के मुताबिक उन्हें बंद करने की इजाजत दे दी है। - एसके सिंह, वन संरक्षक

इत्र बनाने का संयंत्र बंद पड़ा।

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