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75 का दावा, 23 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से रेंग रही मीटरगेज ट्रेनें

7 वर्ष पहले
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खंडवा। मीटर गेज ट्रेन से खंडवा से इंदौर का सफर 6 घंटे में पूरा हो रहा है। रतलाम मंडल 75 किमी प्रति घंटे की स्पीड से ट्रेन चलाने का दावा कर रहा है। हकीकत में ट्रेनें 23 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से रेंग रही हैं। तीन साल पहले तक ट्रेन की रफ्तार 45 किमी प्रति घंटा थी। दो साल पहले स्पीड 30 और अब घटकर 23 किमी प्रति घंटा रह गई। हाल ही में नांदेड़ मंडल ने ट्रेनों की स्पीड 40 किमी प्रति घंटा कर दी। अब अकोला-खंडवा के बीच ट्रेनें दौड़ने लगी हैं। लेकिन रतलाम मंडल मेंटेनेंस नहीं कर रहा है। खंडवा से महू के बीच पुलियाएं धीरे-धीरे डेमेज हो रही हैं। लकड़ी के पुराने स्लीपर सड़ गए हैं।

7कॉशन आर्डर, स्पीड 8 से 20 किमी प्रति घंटा- खंडवा-महूस्टेशन के बीच 7 कॉशन आर्डर दिए जा रहे हैं। इस 50 से 100 मीटर ट्रैक पर ट्रेन की स्पीड धीमी हो जाती है। 8 से 20 किमी प्रति घंटे की स्पीड से ट्रेनें चलाई जाती हैं। ट्रैक खराब होने से ट्रेन को धीमी गति से निकाला जाता है। पुलियाएं और ब्रिज पुराने होने से भी तेज रफ्तार पर रेलवे ने ब्रेक लगा रखे हैं।
6 घंटे में तय हो रहा खंडवा-इंदौर का सफर, खंडवा से महू के बीच 7 जगह कॉशन आर्डर पर 8 से 20 किमी प्रति घंटे की गति से चला रहे
ट्रेन की बजाए जल्दी पहुंचा रही बसें :खंडवा-इंदौरकी दूरी 139 किमी है। सड़क मार्ग से खंडवा-इंदौर 133 किमी है। खंडवा से इंदौर के लिए नॉन स्टाप एसी, नाॅन स्टाप डीलक्स बसें भी चलने लगी हैं। यह बसें ट्रेन की तुलना में इंदौर-खंडवा जल्द पहुंच रही हैं।
इस स्पीड से चल रही ट्रेनें
-खंडवा से लालचौकी तक ट्रेन 10 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलती है।
- लालचौकी से अजंटी तक 25 किमी की स्पीड से चलती है।
- सनावद के बाद 20 किमी की स्पीड पर जाती है।
- घाट सेक्शन में ट्रेन की स्पीड 15-20 के बीच ही रहती है। इससे समय अधिक लग रहा है।
कब, कहां पहुंच रही ट्रेनें
स्टेशन पहले अब
इंदौर 5 घंटे 6 घंटे
महू 3.30 4.30 घंटे
सनावद 1 घंटा 1.30 घंटे
अजंटी 5 मिनट 10 मिनट

75 की स्पीड से ही चला रहे हैं ट्रेनें
''कुछ जगह सुरक्षा की दृष्टि से कॉशन आर्डर दिए हैं। यहां ट्रेन धीमी गति से निकालना पड़ती है। स्पीड पहले कम हुई थी। फिलहाल काम के कारण ही धीमी गति से ट्रेन चलाई जा रही हैं। ट्रैक पर 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ही ट्रेनें चलाई जा रही हैं।'' -जितेंद्र कुमार जयंत, पीआरओ रतलाम मंडल