- आइसोलेशन वार्ड में भर्ती हैं दो संदिग्ध मरीज।
खंडवा। स्वाइन फ्लू बीमारी से डरने की नहीं जागरूक रहने की आवश्यकता है। सतर्क रहने पर यह फैलता ही नहीं है। हो भी जाए तो एलोपैथी के साथ ही होम्योपैथ और आयुर्वेद में भी इसका आसान इलाज है। जरूरत समय से रोग को पहचानने की है।
जिला अस्पताल में एलोपैथ के साथ होम्योपैथ और आयुर्वेद में स्वाइन फ्लू का इलाज मिलता है। आयुर्वेद और होम्योपैथिक क्लीनिक में सर्दी-जुकाम और गले में खराश के मरीजों का इलाज हो रहा है। रोजाना 15 से 20 मरीज क्लीनिक में आ रहे हैं।
होम्योपैथिक डॉ. एसएन वर्मा मरीजों को प्रारंभिक लक्षण के आधार पर दवाएं दे रहे हैं। ज्यादा परेशानी होने पर स्वाइन फ्लू जांच के बाद अन्य दवाएं भी देंगे।
डॉ. वर्मा ने बताया जेलसीमीयम, आर्सेनिक-एल, एलियम सीपा, टयूबर कुलीनम दवा मरीज को दी जाती है। होम्योपैथिक क्लीनिक में दवाओं का स्टॉक है। आयुर्वेदिक डॉ. वीआर वैश्य ने बताया क्लीनिक में त्रिभुवन कीर्ति रस, श्वास-कास चिंतामणि रस, श्रृंग भस्म, सीतोपलादी के साथ कफ की दवाएं हैं।
निजी डॉक्टरों को दिया प्रशिक्षण: निजी नर्सिंग होम एवं डॉक्टरों को जिला अस्पताल में रविवार को स्वाइन फ्लू के इलाज का प्रशिक्षण हुआ। सीएमएचओ डॉ.आरसी पनिका, सीएम डॉ.ओपी जुगतावत, जिला नोडल अधिकारी योगेश शर्मा ने डॉक्टरों को इलाज और केटेगरी के बारे में जानकारी दी।
सी कटेगरी मरीज रैफर : निजी नर्सिंग होम में भर्ती मरीज स्वाइन फ्लू की सी कटेगरी में संदिग्ध मिला। पुनासा निवासी मरीज निजी नर्सिंग होम में 4 दिन से भर्ती था। रविवार को जिला अस्पताल और यहां से स्वाब लेकर इंदौर रैफर किया। नोडल अधिकारी डॉ. संतोष श्रीवास्तव ने बताया दो संदिग्ध भर्ती हैं। सी कटेगरी में सस्पेक्टेड मरीज का सैंपल लेकर इंदौर भेजा है।
आयुर्वेद में यह उपाय :-
- 4-5 तुलसी के पत्ते, 5 ग्राम अदरक, चुटकीभर कालीमिर्च पावडर और हल्दी को एक कप पानी में उबालकर दिन में दो-तीन बार पीएं।
- गिलोय बेल की डंडी को पानी में उबालें। छानकर पीएं।
- आधा चम्मच आंवला पावडर को आधा कप पानी में मिलाकर दिन में दो-तीन बार पीएं।