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संकल्प से ही रोकी जा सकती है कन्या भ्रूण हत्या

7 वर्ष पहले
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कन्या भ्रूण हत्या एक बड़ी समस्या है। रोकने के लिए कानून है। फिर भी पूरी तरह नहीं रोका जा सका। इसे सामूहिक संकल्प से ही रोका जा सकता है। यह बात भ्रूण हत्या एक अभिशाप विषय पर हुई परिचर्चा में बोलते हुए मुख्य वक्ता न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव गंगाचरण दुबे ने कही। मप्र मानव अधिकार आयोग के स्थापना दिवस पर हुई इस परिचर्चा में उन्होंने कहा कि यदि अभी इस कुप्रथा को नहीं रोका गया तो बहुत देर हो जाएगी। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डिप्टी कलेक्टर प्रियंका गोयल ने कहा कि परिचर्चा और संगोष्ठी करने से ज्यादा कुछ हासिल नहीं होगा। हमें भ्रूण हत्या करने वालों को उनकी भाषा में भ्रूण हत्या की बुराइयों को समझाना होगा। कार्यक्रम में नारायण बाहेती शहर के लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन भूपेंद्र चौहान ने किया। आभार आशीष चटकेले ने माना।

लकीड्रा करके दिए पुरस्कार: भ्रूणहत्या एक अभिशाप विषय पर विचार व्यक्त करने के लिए फार्म बांटे गए थे। लगभग 200 लोगों ने अपने विचार लिखे। विचार के फार्म का लकी ड्रा करके पुरस्कार दिए। इसमें रंजना नागले प्रथम, पूजा राठौर को द्वितीय एवं रानी अठोत्रा को तृतीय पुरस्कार मिला। इनके अलावा 7 सांत्वना पुरस्कार दिए गए।

परिचर्चा के बाद रंजना नागले को प्रथम पुरस्कार देते हुए डॉ. प्रियंका गोयल, न्यायधीश गंगाचरण दुबे, नारायण बाहेती।