खंडवा। पेशे से इंजीनियर, जज, डॉक्टर भी अब बच्चों को स्कूलों में पढ़ा सकेंगे। इसके लिए वे अपने घर दफ्तर के पास के एक-एक स्कूल को गोद लेंगे। अफसर करीब के स्कूलों का चयन कर वहां पढ़ने वाले बच्चों को अपने अनुभव, कार्य के साथ ही राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनाने के लिए भी प्रेरित करेंगे। नए साल में शिक्षा विभाग यह अनूठा प्रयोग करने जा रहा है। इसमें जिलेभर के वरिष्ठ अधिकारियों की मदद ली जाएगी। इसके पीछे मंशा यह है कि वरिष्ठ अधिकारी स्वयं एक स्कूल का चयन करेंगे और वहां जाकर छात्रों से राष्ट्र निर्माण समेत विकास, पर्यावरण संरक्षण और सुशासन जैसे विषयों पर चर्चा करेंगे तो नतीजे अच्छे आएंगे। साथ ही अफसरों के सतत निरीक्षण से व्यवस्थाएं भी दुरुस्त होंगी।
अभियान को 1 जनवरी से लागू करने की तैयारी की जा रही है। इस अभियान के लागू होने से छात्र भी अधिकारियों के अनुभवों का लाभ लेते हुए उनका अनुसरण करने का प्रयास करेंगे।
प्रधानमंत्री ने दिया था संदेश
विशेष कक्षाएं लगाएंगे : '' स्कूलोंमें नए साल से प्रशासनिक अधिकारियों की सेवाएं भी ली जाएंगी। विशेषज्ञ इंजीनियर, डॉक्टर अफसर विशेष कक्षाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाएंगे।''-केके पांडे,संयुक्त संचालक, शिक्षा ।
शिक्षक दिवस पर प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा था कि वे सभी डॉक्टर्स, इंजीनियर, अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी जो छात्रों को पढ़ाना और अपने अनुभव उनके साथ बांटना चाहते हैं वे अपने क्षेत्र के स्कूल चिह्नित कर वहां जा सकते हैं। अधिकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को केवल अपने अनुभवों से अवगत करवाएंगे बल्कि, कई राष्ट्रीय विषयों पर बात भी करेंगे। उन अधिकारियों को ज्यादा महत्व दिया जाएगा जिन्होंने विदेशों में काम या ट्रेनिंग ली है।
यह करेंगे अफसर
- अधिकारी सुबह 7 से 9 बजे के बीच मंगलवार गुरुवार को एक घंटे का समय छात्रों के साथ बिताएंगे।
- क्लिप्स, वीडियो, क्विज, कहानी के माध्यम से या कोई और तरीका अपनाकर भी छात्रों को समझाइश देंगे।
- राष्ट्रवादी और गैर राजनीतिक मुद्दों पर कम से कम बीस मिनिट तक छात्रों के साथ बातचीत की जाएगी।
नवाचार : एक-एक स्कूल को गोद लेकर विद्यार्थियों को अपने अनुभवों के साथ राष्ट्र निर्माण की देंगे शिक्षा।