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सद, चित, आनंद तीनों ब्रह्म स्वरूप हैं

7 वर्ष पहले
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सद, चित, आनंद तीनों ब्रह्म स्वरूप हैं

खंडवा|सद,चित, आनंद तीनों ब्रह्म स्वरूप हैं। बुद्धि, स्वभाव और संस्कार को जानने वाले सत्य को पहचानते हैं। यह बात संत अखंडानंद जी ने बुधवार को विट्ठल मंदिर में गीता कथा ज्ञान के दौरान कही। उन्होंने कहा जो व्यापार करते हैं उनके लिए कर्म मार्ग है। चित, चेतना से लगाव रखते हैं। चेतन सर्वोपरि है। उनके लिए ज्ञान मार्ग आवश्यक है। आनंद को प्राथमिकता देने वाले व्यक्ति के लिए भक्ति मार्ग आवश्यक है। ज्ञान मार्ग में बुद्धि की प्रधानता है। कर्म मार्ग में नियम महत्वपूर्ण होता है। ज्ञान मार्ग में किसी का विरोध नहीं होता। समाज में जो झगड़े होते है वे नाम के लिए होते हैं।