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मम्मी-पापा की याद आई तो स्कूल की बजाए इंदौर पहुंचे

7 वर्ष पहले
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ब्लाकके ग्राम खारकला में अपने नाना के यहां रहकर पढ़ने वाले भाई-बहन को तीन-चार दिन से मम्मी-पापा की याद रही थी। वे मंगलवार को स्कूल के लिए निकले लेकिन स्कूल की बजाय बस में बैठ खंडवा गए। उन्हें हरदा जिले के कांकरिया जाना था।

ट्रेनों की जानकारी नहीं होने पर वे मीटरगेज की ट्रेन में बैठ गए। रास्ते में यात्रियों ने अबोध भाई-बहन को अकेले देख पूछताछ की तो उन्होंने सबकुछ सच बता दिया। यात्रियों ने बच्चों को इंदौर जीआरपी के हवाले कर दिया। पुलिस ने बच्चों के बताए पते और नंबर पर फोन कर पिता को इंदौर बुला लिया।

नाना ने पूरे गांव में की बच्चों की तलाश

पिता के सुपुर्द कर देंगे

^कुछ यात्री बच्चों को थाने में छोड़ गए हैं। उनके पिता से बात हो गई है। वे पहुंच ही रहे हैं। बच्चों को उनके सुपुर्द कर दिया जाएगा। अजयपांडे, प्रधानआरक्षक जीआरपी इंदौर

बच्चों के नाना हरिनारायण ने बताया मेरी नातिन लक्ष्मी पिता संतोष और नाती प्रवीण पिता संतोष मेरे पास खारकला में रहकर निजी स्कूल में 8वीं और 5वीं में पढ़ते हैं। मंगलवार सुबह दोनों स्कूल के लिए निकले थे। छुट्टी के बाद जब घर नहीं लौटे तो हमने उन्हें पूरे गांव में ढूंढा। लेकिन वे नहीं मिले। हालांकि लक्ष्मी तीन-चार दिन से स्कूल जाने में आनाकानी कर रही थी। शायद वो माता-पिता के पास जाना चाहती थी। इसलिए मौका पाकर दोनों भाई-बहन बस में बैठकर खंडवा और फिर वहां से गफलत में इंदौर पहुंच गए। हमें उनके सुरक्षित होने की जानकारी मिल गई है। बच्चों के पिता और मैं भी इंदौर के लिए निकल चुके हैं।