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बुजुर्गों के चेहरे पर शब्द लिखे होते हैं
शहरोंमें परिंदों को पानी कौन रखता है। बुजुर्गों की निशानी कौन रखता है। बुजुर्गों का सम्मान करो। उनकी संगति करो। उनके चेहरे की झुर्रियों पर हजार शब्द लिखे होते हैं। कांपती गर्दन संदेश देती है। उनका अनुभव कभी कमजोर नहीं होता है। जो चाहते हो अभी आज कर लो।
यह बात बुधवार को न्यायाधीश गंगाचरण दुबे ने उत्कृष्ट स्कूल में अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस पर आयोजित सम्मान समारोह में ‘वृद्धजनों के अधिकार’ विषय पर कही। उन्होंने कहा जहां बुजुर्गों का सम्मान नहीं होता वहां दरिद्रता रहती है। बूढ़ा व्यक्ति ही सही शिक्षा प्रदान कर सकता है। सरकार बुजुर्गों के लिए वृद्ध आश्रम, शतायु सम्मान, निराश्रित पेंशन, निशक्त पेंशन, दुर्घटना बीमा योजना सहित कई प्रकार की योजनाएं चला रही है। बुजुर्ग अपने हक की लड़ाई लड़े। मुकदमे का पूरा खर्च विधिक सेवा प्राधिकरण देगा।
वृद्धा का सम्मान करते न्यायाधीश दुबे।
एक हजार साल का कैलेंडर किया भेंट
रामनगर के बुजुर्ग रमेशचंद्र यादव ने हाथ से बनाया हुआ एक हजार साल का कैलेंडर श्री दुबे को प्रदान किया। कार्यक्रम में श्री दुबे ने वृद्धों को पुष्पहार पहनाकर श्रीफल भेंट किया। इस दौरान चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष इकबालशंकर गुलाटी, डॉ. जगदीशचंद्र चौरे, जेएन कुकरेजा, आरके मैथिल, शकुंतला तंवर, हंसमुख जोशी आदि का सम्मान हुआ। कार्यक्रम में राजेश शुक्ला, प्राचार्य दीपक ओझा, आयोग मित्र नारायण बाहेती, राजीव शर्मा, सहित स्कूल के बच्चे उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन संदीप जोशी ने किया। आभार जिला नोडल अधिकारी राजेश गुप्ता ने माना।
मानव अधिकार दिवस