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उत्तर प्रदेश के स्टाम्प पर करा लिया डीपीआर बनाने का अनुबंध
^प्रदेश में अनुबंध हुआ है। प्रदेश की संस्था से हुआ है तो स्टांप प्रदेश का होना चाहिए। बाहर के स्टांप पर अनुबंध नहीं किया जा सकता है। वह वैध नहीं हो सकता।^ -अनवरखान, जिलापंजीयक
निगम ने डीपीआर स्वीकृत हुए बिना कंपनी को भुगतान करने की तैयारी कर ली है। शर्तों के मुताबिक शासन से डीपीआर को स्वीकृति मिलने पर भुगतान किया जाएगा। अभी यह शासन को भेजी तक नहीं गई। इससे पहले ही भुगतान के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। एमआईसी में 15 लाख का बिल पास किया है।
भास्कर संवाददाता|खंडवा
निगमप्रशासन ने ग्रीन एप्पल से उत्तर प्रदेश के स्टांप पर अनुबंध किया है। यानी अनुबंध में लगे स्टांप का पैसा प्रदेश शासन को नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार को गया है। नियमानुसार प्रदेश में अनुबंध होने की स्थिति में स्टांप भी स्थानीय स्तर से लिया जाना था। स्टांप की कीमत का रुपया प्रदेश शासन को जाता। सीवरेज की डीपीआर बनाने में ऐसा नहीं किया है। अनुबंध एक्ट के तहत निगम प्रशासन और ग्रीन एप्पल के बीच हुआ अनुबंध वैद्य नहीं है। उत्तर प्रदेश के स्टांप का मूल्य प्रदेश में शून्य है। अनुबंध भी शून्य होगा। डीपीआर बनाने वाली कंपनी की गलती पर निगम कोई प्रकरण दायर करना चाहे तो वह नहीं कर पाएगा। उसके पास ऐसा कोई प्रमाण नही है जिसके आधार पर यह सिद्ध किया जा सके कि दोनों के बीच कोई अनुबंध हुआ है।
2करोड़ पर सबकी नजर
डीपीआरबनाने वाली कंपनी को प्रोजेक्ट लागत का 0.53 प्रतिशत दिया जाना है। प्रोजेक्ट 441 करोड़ का है। इसका 0.53 प्रतिशत ढाई करोड़ रुपए होता है। काम बमुश्किल 30 लाख से भी कम का है। कंपनी ने शहर में ज्यादा काम नहीं किया है। कंपनी का हित करने के लिए नियमों को ताक पर रखने वालों की नजर इस 2 करोड़ में से मिलने वाले हिस्से पर रही है।