जैविक उत्पाद बेचने की अलग हो व्यवस्था
जैविकखेती को बढ़ावा देने और खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए शासन केवल दिखावा कर रहा है। खेती आज भी घाटे का सौदा है। जैविक खेती करने को बोला जाता है पर मंडी कहीं नहीं बनाई है। खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं बल्कि न्यूनतम लाभकारी मूल्य की जरूरत है। इसी तरह जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए इन उत्पादों को बेचने के लिए अलग स्थान या मंडी बनाने की जरूरत है। यह बात भास्कर कार्यालय में किसानों ने दिए। प्रगतिशील किसान अभय जैन, राजेंद्र प्रजापति, श्रीकांत गोखले, मार्को मुजाल्दे, राजेंद्र प्रजापति खुदीराम बोस, राजेंद्र नामदेव ने कहा कि सरकार केवल दिखावा कर रही है। लोगों को योजनाओं की जानकारी ही नहीं है। पर योजनाएं चल रहीं है। सब्सिडी अफसर खा रहे हैं। आम किसान परेशान है। उसे कहीं कोई राहत नहीं है। खाद, बीज, पानी, बिजली कुछ भी समय से नहीं मिलता है।
किसानों ने कृषि की सबसे बड़ी समस्या फसल आने पर उचित मूल्य मिलना बताया। किसानों की समस्याओं पर बात करते हुए किसानों ने कहा कि फसल आने पर सोयाबीन 3 हजार रुपए प्रति तक बिकता है। बीज लेने जाते हैं तो वही 6 से 7 हजार रुपए क्विंटल मिलता है। इस अंतर को रोकने की जरूरत है।
फसल आने पर नहीं मिलता मूल्य