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डूब प्रभािवतों ने अधिग्रहित जमीन पर कब्जा मांगा
नर्मदाबचाओ आंदोलन ने नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत ओंकारेश्वर बांध परियोजना में उन क्षेत्रों का भूमि अधिग्रहण समाप्त करने की मांग है, जहां प्रभावितों का भौतिक कब्जा है। हालांकि यह कानून लागू करने के लिए प्रदेश सरकार अभी नियम तय करने में ही लगी है। अब तक कुछ तय नहीं कर पाई है।
नर्मदा बचाओ आंदोलन के आलोक अग्रवाल ने बताया नए भूमि अधिग्रहण कानून 2013 में बना है। यह 1 अप्रैल 2014 से पूरे देश में लागू हो गया है। कानून के मुताबिक भू-अर्जन अधिनियम 1894 के तहत जहां भी सरकार ने किसी निजी संपत्ति का अवार्ड 1 जनवरी 2014 का से 5 साल पहले पारित किया है। संपत्ति पर मालिक का कब्जा बरकरार है। वहां उस संपत्ति की भू अर्जन प्रक्रिया निरस्त हो जाएगी। ओंकारेश्वर परियोजना में 2500 किसानों की 5 हजार एकड़ जमीन डूब से बाहर है। प्रभावित खेती कर रहे हैं। भूमि अधिग्रहण 2005 07 में हुआ। मतलब 5 साल से ज्यादा समय हो गया है। नए कानून के तहत अधिग्रहण समाप्त हो गया है। प्रेस कान्फ्रेंस के बाद एनबीए के कार्यकर्ता और प्रभावित लोग कलेक्टोरेट एवं एनएचडीसी गए। उन्होंने एडीएम को ज्ञापन देकर भू राजस्व के सभी अभिलेखों में मकानों और जमीन के मालिकाना हक पर नाम दर्ज करने ऋण पुस्तिका दिलाने की मांग की।
13 बिंदुओं पर तय की कार्यवाही
जबलपुरउच्च न्यायालय एडवोकेट नित्यानंद मिश्रा के मुताबिक नए कानून में अधिग्रहण के प्रत्येक बिंदु पर अलग-अलग छूट दी है। इसमें अवार्ड होने, अवार्ड के बाद कब्जा होने, भुगतान होने, आंशिक भुगतान होने सहित कुल 13 बिंदु हैं। प्रत्येक पर अगल-अलग कार्यवाही करना है। शासन नियम बना रहा है। अभी कुछ तय नहीं हुआ है।
ज्ञापनदेखकर करेंगे कार्रवाई
^मैं बैठक में इंदौर आया हूं। ज्ञापन देखने और उसमें बताए नियम को देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। देखने के बाद आगे कार्यवाही की जाएगी।^-एमके अग्रवाल,कलेक्टर
एडीएम एसएस बघेल को ज्ञापन देते आलोक अग्रवाल चित्तरूपा पालित।