बेटी ने समझाया तो माता-पिता फिर एक हुए
मांके साथ रह रही 8 साल की बच्ची को जज ने पिता के प्रति मोह की कहानी सुनाई। कहानी सुनकर उसका अपने पिता के प्रति स्नेह जाग उठा। उसने अलग रह रहे माता-पिता को समझाया। दो साल से रिश्तों के बीच खड़ी दीवार फिर मजबूत हो गई और एक बिखरा परिवार फिर एक साथ रहने के लिए राजी हो गया।
गुरुवार को न्यायाधीश गंगाचरण दुबे की कोर्ट में पेशे से शिक्षिका ममता (परिवर्तित नाम) सहायक भू-अभिलेख अधिकारी शैलेंद्रसिंह (परिवर्तित नाम) का मामला आया। दोनों पक्षों ने चरित्र शंका, दहेज प्रताड़ना, शराब सेवन, माता पिता के घर जाने देने, बच्चों के भरण पोषण के चलते न्यायालय में केस दायर किया था। दंपत्ति की 1999 में शादी हुई थी। उनकी तीन बेटियां हैं। आपस में नहीं बनने के कारण दोनों पिछले दो वर्षों से अलग रह रहे थे। बेटियां मां के पास रह रही थी जबकि पिता अकेले ही जीवन यापन कर रहा था।
जज गंगाचरण दुबे ने दोनों पति प|ी से बात की। दोनों समझौते को तैयार नहीं थे जबकि बेटी मोनिका (8) अपनी दो बहनों और मम्मी-पापा को एक साथ रहते देखना चाहती थी। वह चाहती थी दोनों लड़ें नहीं और हंसी खुशी हमारे साथ रहे। श्री दुबे ने मोनिका को कहानी में पुत्री का पिता के प्रति प्रेम दिखाया। उसके दिल में मां के साथ पिता के प्रति भी स्नेह जागृत हुआ। उसने माता-पिता को साथ रहकर जीवन गुजारने की गुजारिश की। दोनों मान गए और जज के सामने राजीनामा करने का निर्णय लिया। जज ने फैसला सुनाया कि दोनों पति प|ी एक दूसरे का सम्मान करेंगे, संपत्ति को एक-दूसरे की सहमति से खरीदेंगे या बेचेंगे, एक दूसरे पर शंका नहीं करेंगे, माता-पिता के यहां जाने आने से नहीं रोकेंगे। मामले में आवेदिका की ओर से अधिवक्ता महेश मालाकार अनावेदक की ओर से पुष्पा गौर थी।
ऐसे दूर हुआ मनमुटाव
कोर्ट ने मिलाया