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शराब छोड़ी, पैसा जोड़ा और खरीद ली बैल जोड़ी
> पहले नशे में घूमते थे अब खेत में चला रहे हैं हल
> दो साल से हाथ नहीं लगाया शराब को
अतुलदुबे. खंडवा
भकराड़ा गांव के दिलीप सिंह ने शराब छोड़ दी। जो पैसा शराब में उड़ा देते थे, उन्हें जोड़ना शुरू किया। दो साल में 40 हजार रुपए जोड़ लिए। इन पैसों से एक जोड़ी बैल खरीदी खेती में जुट गए।
दिलीप सिंह ने बताया उन्हें स्वयं ही शराब छोड़ने की प्रेरणा हुई। इसके बाद ब्रह्माकुमारी आश्रम के लखनलाल के संपर्क में आए। तब से शराब को हाथ भी नहीं लगाया है। घर-परिवार के लोग खुश हैं। गांव में इज्जत बढ़ गई। बच्चे पढ़ रहे हैं। पहले खाने-पीने के लिए भी पैसे नहीं रहते थे। हर रोज 200 से लेकर 1000 रुपए तक खर्च कर देता था। घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए कुछ नहीं बचता था। जब से नशा करना छोड़ा तब से जेब भरी रहती है। घर की सारी जरूरतें पूरी करने के बाद भी रुपए बच जाते हैं।
इन्होंनेभी छोड़ा नशा - गांवके मनोहर सिंह, महेश पवार, राजपाल पवार ने भी शराब तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट गुटखा त्याग दिया। महेश पवार ने बताया वे गुटखा, तंबाकू खाते थे। दांत पीले पड़ गए थे। खांसी भी आती थी। तंबाकू गुटखा छोड़ने के बाद दांत साफ रहते हैं। खांसी भी नहीं आती। खुराक भी बढ़ गई है। गांव के गोविंद पिता जसवंत ने शराब छोड़ दी है। अब वह तंबाकू छोड़ने का प्रयास कर रहा है।
दिलीपसिंह अपने बैलों को चारा खिलाते हुए। इनके पास 12 एकड़ जमीन है।
कर रहा नशामुक्त गांव का प्रयास
गांवको नशा मुक्त करने के लिए ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय प्रयास कर रहा है। गांव में रैली, घर-घर संपर्क के माध्यम से शराब बंदी की जा रही है। शनिवार को हनुमान मंदिर तक रैली निकाली। ब्रह्मकुमारी आश्रम के लखनलाल ने बताया कि गांव में शराब बिकना बंद करा दी जाएगी। गांव की दुकानों से गुटखा, तंबाकू बिकना बंद हो रहा है। दुकान वाले नया स्टाक नहीं ला रहे हैं।
भकराड़ा गांव के दिलीप सिंह ने शराब छोड़ी तो संवर गया खुद और परिवार का जीवन
बदलाव