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अफसरों की अनदेखी ने सुखा दिए पूर्वजों की याद में रोपे पौधे
एकसाल पहले संस्कार वन में पूर्वजों की यादों में लगाए पौधे सूख गए हैं। इनके साथ ही यादें भी सूख गई हैं। संस्कार में रोपे पौधे नहीं बचे हैं। वन विभाग पूर्वजों की याद में पैसे देकर लगाए गए 45 पौधे भी नहीं संभाल पाया है।
इंदौर रोड पर वन विभाग ने जून 2013 में संस्कार वन लगाया था। दादाजी कॉलेज के पास 6.69 हैक्टेयर जमीन पर कुल 2 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य था। जनभागीदारी से इस वन में पौधे लगाने के लिए विभाग ने लोगों को प्रेरित किया। एक पौधा लगाने पर 1 हजार रुपए शुल्क भी लिया। पौधे लगाने से पहले ही एडवांस बुकिंग शुरू की गई थी। करीब 45 पौधे शुल्क लेकर रोपे गए। इसके बावजूद पौधों की सुरक्षा और देखभाल के पुख्ता इंतजाम नहीं हुए। पौधों को नियमित रूप से पानी नहीं मिलने से सूख गए हैं। जिन्होंने अपने पूर्वजों की याद में पौधे रोपे थे वे काफी आहत हैं। वे जिम्मेदारों को कोस रहे हैं। संस्कार वन उजाड़ हो गया है।
संस्कार वन में रोपे पौधे सूख गए हैं।
जवाब नहीं दे पाए अफसर, टाल गए
अफसरोंसे संस्कार वन के सूखने के संबंध में पूछा गया तो वे जवाब नहीं दे पाए। डीएफओ एसएस रावत बहाने बनाने लगे। उन्होंने कहा कि मैं कहीं काम से हूं। बाद में फोन लगाता हूं। इसके बाद उन्होंने बात नहीं की। फोन लगाने पर उठाया नहीं। सीसीएफ पंकज श्रीवास्तव को तो संस्कार वन की जानकारी तक नहीं है। उन्होंने कहा कि क्या स्थिति है डीएफओ से पूछकर बताऊंगा।
पूर्वजों की याद में लगाए थे पौैधे
शहरके 30 लोगों ने स्वेच्छा से बुकिंग कराई थी। माता-पिता की याद में लोगों ने पौधे लगाए। टिंबर मर्चेंट एसोसिएशन के डीएन पांडे, समाज सेवी गुरमीतसिंह उबेजा ने अपने पिता की स्मृति में पौधा लगाया। इसी प्रकार किरण पटेल सहित अन्य लोगों से वन विभाग में राशि जमा करवाकर पूर्वजों की याद में पौधारोपण के लिए शहर लोगों को प्रेरित किया था।
यहथी विभाग की योजना
पूर्वजोंकी स्मृति में लोग पौधे लगा सकते थे। इन पौधों के पास विभाग को पूर्वजों के नाम की पट्टिका लगाई जानी थी। वन विभाग ने एक पौधा रोपने के लिए एक हजार रुपए शुल्क लिया। इस शुल्क से पौधे के बड़े होने तक देखभाल की जानी थी।
सरकारी तंत्र