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कम अनुभवी कंपनी को दिया डीपीआर का काम

7 वर्ष पहले
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शहरमें अंडरग्राउंड सीवरेज के लिए डीपीआर बनाने का काम कम अनुभवी कंपनी को दे दिया। यह डीपीआर के लिए तय मापदंड के खिलाफ है। निगम के पदाधिकारियों, अफसरों ने क्वालिटी एंड कंट्रोल बेस्ड सलेक्शन मेथड को ताक पर रखकर चहेती कंपनी को काम दिलाया है। इसका खुलासा सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी से हुआ।

शहर के लिए 441 करोड़ रुपए का प्रस्तावित अंडरग्राउंड सीवरेज सिस्टम की डीपीआर बनाने के लिए 28 फरवरी 2012 में टेंडर हुए। इसमें तीन कंपनियों एक्सेल कंसलटेंसी एंड प्रोजेक्ट जयपुर, ग्रीन एपल इन्फ्रास्ट्रक्चर लखनऊ, एपीआर प्रोजेक्ट लिमिटेड जयपुर ने टेंडर भरे। इन कंपनियों में से किसी एक का चयन क्वालिटी एंड कंट्रोल बेस्ड सलेक्शन मेथड के मुताबिक होना था। इस मेथड में सबसे ज्यादा अंक 923 एक्सल कंसल्टेंसी जयपुर के थे। दूसरे नंबर पर 767.6 अंक लेकर एपीआर प्रोजेक्ट जयपुर रही। सबसे कम अंक 764 ग्रीन एप्पल लखनऊ के आए। काम सबसे कम अंक प्राप्त करने वाली ग्रीन एप्पल लखनऊ को दिया गया। जबकि टेंडर में क्यूसीबीएस मेथड के मुताबिक काम देने की शर्त थी।

ऐसे हुई गड़बड़ी

यह है क्यूसीबीएस की प्रक्रिया

क्यूसीबीएस(क्वालिटी एंड कंट्रोल बेस्ड सलेक्शन) मेथड कंपनियों का चयन करने के लिए बनाई गई है। इसके के मुताबिक कंपनियों के कार्य अनुभव, रेट, क्षमता के आधार पर अंक दिए जाते हैं। मिले अंकों को जोड़कर सबसे अधिक अंक प्राप्त करने वाली कंपनी को काम दिया जाता है।

तकनीकी समिति का फैसला

^डीपीआरबनाने का काम देने की फैसला तकनीकी समिति ने किया है। इसमें सभी शर्तों का पालन हुआ है। यह केवल डीपीआर बनाने का काम है।^ -एसआर सोलंकी, आयुक्त,नगर निगम

जाएंगेलोकायुक्त में

^टेंडरकी शर्तों का उल्लंघन करके कंपनी का फायदा पहुंचाया गया है। प्रकरण को लोकायुक्त में ले जाएंगे।^ -जगन्नाथमाने, आरटीआईकार्यकर्ता

चहेती कंपनी को काम देने के लिए सभी हथकंडे अपनाए। टेंडर देने का फैसला करने की तकनीकी समिति में शामिल उप यंत्री सगीर अहमद ने तो ग्रीन एप्पल को अंक देने से ही इंकार कर दिया था। इसी तरह की टिप्पणी उपयंत्री अंतर सिंह आर्य ने भी की है। कुछ दिन बाद इन दोनों का स्थानांतरण हो गया। स्थानीय स्तर पर मामला उलझता देख फैसला करने के लिए नगरीय प्रशासन विभाग से मार्गदर्शन मांगा। विभाग के अफसरों ने एमआईसी के सक्षम होने की बात कहते हुए निव