खंडवा। 40साल पहले दोनों की शादी हुई। एक के बाद एक दो मंदबुद्धि संतान हुई। निराशा में पति, पत्नी को प्रताड़ित करने लगा। 30 साल तक दोनों अलग रहे। अब जब दोनों बूढ़े हो चुके हैं, दोनों ने साथ रहने का निश्चय किया। भीकनगांव के पास सिवना की रहने वाली सरस्वतीबाई का विवाह 40 साल पहले जगदीश पिता बल्लूसिंह राजपूत निवासी टेमी कला बगमार के साथ हुआ। दस साल के दरमियान सरस्वतीबाई ने बेटे कालू और बेटी ज्योति को जन्म दिया। इत्तफाक से दोनों ही मंदबुद्धि थे।
पति जगदीश भी निराश हो गया। वह पत्नी को प्रताड़ित करने लगा। उसके मन में यह बात घर गई कि तीसरी संतान भी कहीं मंदबुद्धि हो जाए। उसने पत्नी से दूरी बना ली। दोनों के बीच आए दिन विवाद होने लगे। सरस्वती अपने दोनों बच्चों को लेकर मायके सिवना चली गई।
वहां उसने बगैर तलाक लिए 30 साल गुजार दिए। भाइयों के खेत में मजदूरी की। उम्र से पहले ही बुढ़ापा गया। अब जब हाथ-पैर जवाब देने लगे तो सरस्वतीबाई (55) ने 3 दिसंबर 13 को कोर्ट की शरण ली। उसने मांग रखी कि या तो पति उसे अपने साथ रखे या भरण-पोषण दे।
कोर्ट ने मध्यस्थता की। आखिरकार जगदीश पत्नी और बेटे को साथ रखने को राजी भी हो गया। कोर्ट ने प्रायोगिक तौर पर दो महीने के लिए दोनों को साथ रहने के आदेश दिए। दो महीने दोनों सुख से रहे। बुधवार को पति-पत्नी ने कोर्ट से कहा कहा अब हम साथ-साथ रहना चाहते हैं। जज गंगाचरण दुबे ने दोनों में समझौता कराया जिसका आदेश 13 दिसंबर को लोक अदालत में होगा। समझौता कराने में वकील पुष्पा गौर और दिनेश
सोनी ने भी मध्यस्थता की।
जज ने उनसे कहा- खेत में काम करते-करते दोनों के बाल पक गए। जवानी से बुढ़ापा गया। 30 साल से अलग हो। अब तो सुकून से जीवन बिताओ। लेकिन पत्नी को डर था कि पति ने तीस साल तक पलटकर नहीं देखा अब वह कैसे साथ रखेगा।
ऐसे में पति-पत्नी की अपनी-अपनी दलील : पति जगदीश का कहना था बेटा-बेटी दोनों ही मंदबुद्धि है और संतान पैदा कर उन्हें कष्ट नहीं देना चाहता। इसलिए मैंने अलग ही रहने का फैसला किया था। अब लग रहा है इसमें पत्नी की क्या गलती है, इसलिए साथ रहने का निश्चय किया। इधर, पत्नी सरस्वीतबाई ने कहा मंदबुद्धि संतान हो रही, इसमें मेरा क्या कसूर था। अच्छा हुआ उन्हें अब समझ में गया।
बेटा बोला- अब मुझे पिता का प्यार मिल गया - सरस्वतीऔर जगदीश की बड़ी बेटी ज्योति की शादी हो गई। बेटा कालू सिंह (30) ने पिता का नाम ही सुना था। बुधवार को फैसला होने पर कालू ने कहा धन्यवाद जज साहब। अब मुझे अपने पिता का प्यार भी मिल गया।
हम साथ-साथ हैं : मंदबुद्धि संतान पैदा होने पर आए दिन हो रहे विवाद के बाद हुए थे जुदा।
(जगदीश और सरस्वतीबाई अपने बेटे कालू के साथ।)