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7 हजार हेक्टेयर रकबे में हुई गेहूं की बोवनी

7 वर्ष पहले
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रबीसीजन में उद्यानिकी फसलों में प्याज बहुतायत में लगाया जाता है। इस वर्ष भी पंधाना सहित आसपास के क्षेत्रों में किसानों ने गेहूं लगाते हुए प्याज की फसल अपने खेतों में लगाई है।

सिंचाई के लिए 10 घंटे मिल रही बिजली

ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित खेतों में सिंचाई के लिए विद्युत विभाग द्वारा 10 घंटे बिजली दी जा रही। बिजली कंपनी द्वारा 6 घंटे दिन 4 घंटे रात में बिजली सप्लाई की जा रही है। विभाग ने पहले की ही तरह सिंचाई के लिए कटौती का समय निर्धारित किया है।

भास्कर संवाददाता| खंडवा

जिलेभरमें 95 फीसदी रबी फसलों की बोवनी हो गई है। 1.62 लाख हेक्टेयर भूमि पर रबी फसलों की बोवनी का लक्ष्य था। जिसमें 25 हजार हेक्टेयर में चने की बोआई पूरी हो गई। जबकि 1.25 लाख हेक्टेयर गेहूं में मात्र 5 फीसदी बोवनी बाकी है। बचे 12 हजार हेक्टेयर भूमि पर मटर, अरबी, उद्यानिकी फसलों सहित अन्य फसलों की बोवनी भी कर दी गई है।

दिसंबर के प्रथम सप्ताह तक जिले में रबी फसलों की बोवनी लगभग पूरी हो गई है। बोआई के बाद किसान खेतों में खाद, यूरिया कीटनाशकों का छिड़काव कर रहे हैं। एक दो दिन में बढ़ी ठंड से किसानों काे अच्छे उत्पादन की आस बढ़ गई है। गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष 7 हजार हेक्टेयर अधिक भूमि पर बोआई की गई है। यह पानी की उपलब्धता के कारण संभव हुआ है। रबी की फसलों के मुख्य स्रोत ट्यूबवेल, नदी नाले हैं। इसके अलावा पुनासा उद्वहन सिंचाई, इंदिरा सागर बांध, ओंकारेश्वर बांध से भी फसलों की सिंचाई के लिए पानी मिलेगा।

बैकवाटर एरिया में लगेगा मूंग, मक्का: रबीसीजन खत्म होते ही बैक वाटर वाले क्षेत्रों में मूंग, मक्का जैसी फसलों की बोवनी होगी। उसके बाद मानसून आते ही खरीफ फसलों की तैयारी शुरू होगी।

^जिलेमें रबी फसलों की बोवनी लगभग पूरी हो गई है। जो क्षेत्र बचे हैं वहां भी किसानों ने बोआई शुरू कर दी है। ओपीचौरे, उपसंचालक कृषि