विवादों को छोड़, धर्म की बात करें
खंडवा. मनुष्यजीवन चिंतामणि र| के समान है। इसका परोपकार में उपयोग करो। परोपकार के समान दूसरा कोई धर्म नहीं है। घासपुरा मंदिर में सोमवार सुबह प्रवचन देते हुए मुनिश्री विशेष सागर जी महाराज ने यह विचार व्यक्त किए। मुनिश्री ने कहा कि आज का व्यक्ति कितना समझदार हो गया है कि पुण्य कार्य तो नहीं करना चाहता और पुण्य का फल जरूर भोगना चाहता है। शुभ कार्य करता नहीं है और लाभ प्राप्त करने में जुटा रहता है। यहीं कारण है कि दुकान के बही-खाते में लाभ-शुभ लिखता है। मुनिश्री सोमवार से मोघट रोड स्थित आदिनाथ जैन मंदिर जैन छात्रावास में विराजमान हैं। वे सुबह छात्रावास में प्रवचन देंगे।