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जनवरी में लगेगी टंट्या भील की प्रतिमा

7 वर्ष पहले
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टंट्यामामा। एक ऐसा नाम जो जीवन भर अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ते रहे। लड़ते हुए शहीद हो गए। ग्वालियर में एक बार फिर जीवंत हो उठे हैं। ऐसा संभव हुआ है मूर्तिकार प्रभात राय द्वारा बनाई आदमकद प्रतिमा से। राय ने यह मूर्ति मेटेलिक तैयार की है। यह हू-ब-हू टंट्या भील की तरह ही है। यह मूर्ति जनवरी में पंधाना ब्लाक के बड़ोदा अहीर गांव में लगाई जाएगी। शहीद टंट्या भील का स्कल्प्चर मध्यप्रदेश के संस्कृति विभाग ने बनावाई है। इसे दो करोड़ से अधिक की लागत से बने टंट्या भील स्मारक में लगाया जाएगा। मूर्ति 8 लाख से ज्यादा लागत से तैयार हुई है।

मूर्तिकार प्रभात राय ने बताया कि स्वराज भवन से मिले चित्र के आधार पर मूर्ति तैयार की है। प्रयास किया है कि मूर्ति में टंट्या भील के सभी भाव नजर आएं। उन्होंने बताया खासतौर पर ब्रांज मैटल की कास्टिंग करके बनाई गई है ताकि इस पर मौसम का कोई विपरीत असर नहीं पड़े।

बड़ोदा अहीर जन्म स्थली है टंट्या की : बड़ोदा अहीर टंट्या भील की जन्म स्थली है। उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के शोषण के विरुद्ध ग्रामीणों को एकत्रित किया। जनता के पक्ष में अंग्रेजों से खिलाफत की। अंग्रेजों की सत्ता के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए जननायक टंट्या को ‘इंडियन रॉबिनहुड’ का खिताब दिया। वर्ष 1889 में टंट्या भील को जबलपुर जेल में फांसी दी गई।

ऐसे बनी है मूर्ति

- पहले मिट्टी की मूर्ति बनाई गई।

- मिट्टी की मूर्ति के ऊपर पीओपी डाला गया। इससे मूर्ति का सांचा तैयार हुआ।

- इस सांचे में मोम और मेटेलिक ब्रिक्स का पावडर डाला गया।

- इसे 1400 सेंटीग्रेड तक गर्म किया। मोम जल गई। केवल मेटेलिक बचा।

- मेटेलिक मूर्ति तैयार हो गई।

(टंट्या मामा की आदमकद प्रतिमा।)