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मनमानी कर रहे जिले के निजी स्कूल नहीं दे रहे विक्रेताओं की जानकारी

6 वर्ष पहले
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शिक्षासत्र 2015-16 के लिए जिला शिक्षा विभाग ने जिले के निजी स्कूलों से स्कूल में उपयोग की जाने वाली पुस्तकों के प्रकाशकों उनके विक्रेताओं की जानकारी मांगी थी। 31 जनवरी तक जानकारी नहीं मिलने पर विभाग ने जिले के कई स्कूलों को नोटिस पहुंचाए थे। नोटिस के सप्ताहभर बाद भी कई स्कूलाें ने विभाग को जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है। विभाग द्वारा किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं करने से वे मनमानी पर उतर आए हैं। बाजार में पुस्तक विक्रेता भी विभाग द्वारा लिस्ट जारी होने की राह देख रहे हैं।

जिले में 310 निजी स्कूलें संचालित हैं। इनमें शहर के करीब एक दर्जन स्कूल भी शामिल हैं जिनसे जानकारी मांगी गई थी। इनमें से कुछ ने जानकारी विभाग को उपलब्ध करा दी है। स्कूलों से पुस्तकों के साथ-साथ यूनिफार्म के ड्रेस कोड उनके विक्रेताओं की जानकारी भी मांगी थी।

नहीं होता निर्देशों का पालन

शिक्षाविभाग हर साल शहर के निजी स्कूलों से जानकारी मांगता है। स्कूल प्रबंधन विभाग के निर्देशों का पालन नहीं कर जानकारी देने में आनाकानी करते हैं। मनमानी कर प्रबंधन द्वारा स्कूल के बाहर बोर्ड चस्पा कर एक ही दुकान से किताबें यूनिफार्म खरीदने की जानकारी चस्पा कर दी जाती है। पालक भी मजबूरी में स्कूलों द्वारा तय की गई दुकानों से ही किताबें यूनिफार्म खरीदते हैं। इतना होने के बाद भी विभाग मौन रहकर स्कूल प्रबंधनों पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं करता।

शहर के आधे स्कूल बाकी

^शहरमें करीब एक दर्जन स्कूलों से जानकारी मांगी गई थी। अभी तक आधे स्कूलों ने ही जानकारी भेजी है। जानकारी उपलब्ध नहीं कराने पर कार्रवाई की जाएगी। संजीवभालेराव, डीईओ

कार्रवाई की मांग करेंगे

^स्कूलेंजानकारी देने में आनाकानी कर रही है। डीईओ के निर्देश के बाद भी वे स्कूल प्रबंधन जानकारी नहीं दे रहा। ऐसा है विभाग से कार्रवाई की मांग करेंगे। -विमल खंडेलवाल, अध्यक्ष पालक संघ